केंद्र सरकार ने देश में फ्लोटिंग सोलर पावर को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹5,070 करोड़ के परिव्यय वाली इस योजना को मंजूरी दी। इसका लक्ष्य देश में 5,000 मेगावाट की Floating Solar Photovoltaic यानी FSPV क्षमता विकसित करना है।
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की खासियत यह है कि इनमें जमीन की जरूरत कम होती है। पानी की सतह पर सोलर पैनल लगाने से बड़े भू-भाग को बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की जरूरत घट सकती है। पानी का कूलिंग प्रभाव सोलर पैनलों की कार्यक्षमता में भी मदद कर सकता है, जबकि जलाशयों की सतह पर पैनल लगाने से वाष्पीकरण में कमी आने की संभावना रहती है।
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भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है और ऐसे में Floating Solar एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। योजना में ऊर्जा भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं को भी बढ़ावा देने की बात सामने आई है। इससे सौर ऊर्जा की उपलब्धता को अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल इसके जमीन पर क्रियान्वयन का है—कौन से जलाशय चुने जाएंगे, परियोजनाएं कितनी तेजी से बनेंगी और उत्पादित बिजली उपभोक्ताओं तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचेगी।
आपकी राय: क्या भारत को जमीन के बजाय जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।



