सफाई से लेकर कई क्षेत्रों में देश में अपना नाम कमा चुके इंदौर के सरकारी सिस्टम को पता नहीं क्या हो गया है? कभी एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में नवजात बच्चों को चूहे कूतर जा रहा रहे हैं, तो कभी नशे में धुत एक ट्रक ड्राइवर भरी सड़क पर लोगों को कुचलते निकल जा रहा है। शहर के लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर यह हो क्या रहा है?
शहर का कोई ऐसा चौराहा नहीं होगा, जहां शाम को ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहते। हर जगह बैरिकेड लगाए जाते हैं। हां, यह अलग बात है कि ये ट्रैफिक संभालने की बजाए किसी कोने में खड़े होकर अपना शिकार ढूंढते रहते हैं। सबसे ज्यादा निशाना परिवार सहित जा रहे लोगों को बनाया जाता है। टू व्हीलर, फोर व्हीलर वालों के कागजात से लेकर अल्कोहल तक की जांच हो जाती है, लेकिन आजू-बाजू से गुजर रहे बड़े वाहन उनकी नजर में नहीं आते। ट्रैफिक का स्टाफ अपने काम में इतना मशगूल रहता है कि चौराहे पर चाहे कितना भी जाम लग जाए, चिल-पौं मचने लगे, लेकिन वे अपने ‘कर्त्तव्य’ से टस से मस नहीं होता।
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यह तेज रफ्तार ट्रक एरोड्रम थाने के सामने से होता हुआ कालानी नगर से रामचंद्र नगर होकर लोगों को कुचलता बड़ा गणपति तक पहुंच जाता है, लेकिन किसी ट्रैफिककर्मी या थाने के स्टाफ की नजर नहीं पड़ती। एरोड्रम थाने का स्टाफ भी आंख पर पट्टी बांधे बैठा रहता है।
कल की घटना के बाद अब मातमपुर्सी शुरू हो गई है। सारे विभाग एक साथ जाग गए और सारे नियम-कानून भी याद आने लगे। आज से चौराहों पर कुछ ज्यादा ही मुश्तैदी दिखेगी, विशेषकर एयरपोर्ट रोड पर, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि कल उस समय सिस्टम कहां था, जब बेकाबू ट्रक लोगों की जान ले रहा था।
इस सिस्टम के जिम्मेदारों जरा अपने दिल पर हाथ रखकर सोचो, क्या आप कल का हादसा नहीं रोक सकते थे?
आप आम लोगों की जान की रक्षा नहीं कर सकते, तो फिर आपको कोई अधिकार नहीं कि आप उन्हें परेशान करें। अगर थोड़ी भी जमीर बची हो तो आज से चौराहों पर दिखना मत…



