इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों पर सबसे ज्यादा चर्चा नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान की रही, जिसमें उन्होंने एक न्यूज चैनल के पत्रकार को जवाब देते हुए कहा था-घंटा सवाल। इस घंटे की गूंज पूरे देश में गूंजी, लेकिन इसका खामियाजा देवास के एसडीएम आनंद मालवीय को भी भुगतना पड़ा है।
उज्जैन के संभागायुक्त आशीष सिंह ने देवास के एसडीएम आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया है। इसका कारण प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही बताई जा रही है, लेकिन असल में कैलाश विजयवर्गीय का घंटा वाला बयान ही मालवीय के निलंब की असली वजह है। दरअसल मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस देवास में प्रदर्शन करने वाली थी। इसके लिए एसडीएम ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 3 जनवरी को ड्यूटी का आदेश जारी किया था, जिसमें मंत्रीजी के बयान की निंदा की गई थी।
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यह रहा एसडीएम का आदेश
इंदौर में भाजपा शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए मल मूत्र युक्त गंदा पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई और 2800 व्यक्ति उपचारत हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकार के प्रश्न के जवाब में अशोभनीय टिप्पणी “घंटा” का उपयोग करना अमानवीय ओर निरंकुशता की निशानी है। प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री जीतू पटवारी जी के निर्देशनुसार निर्णय लिया गया है कि इस अमानवीय व्यवहार के विरोध में भाजपा के सांसद एवं विधायकों के निवास के सामने घंटा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। अतः उक्त अवसर पर कानून एवं व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए कानून एवं व्यवस्था को बनाये रखने के लिए निम्नानुसार तहसीलदार एवं कार्यपालिक दण्डाधिकारी, राजस्व निरीक्षक / पटवारियों की ड्यूटी दिनांक 04.01. 2026 समय दोपहर 12.00 बजे से कार्य समाप्ति तक के लिए लगाई जाती है।
आदेश बाहर आते ही मची खलबली
एसडीएम का यह आदेश जारी होते ही खलबली मच गई। इसमें न केवल मंत्रीजी के बयान को अमानवीय ओर निरंकुशता की निशानी बताया गया था, बल्कि जीतू पटवारी के लिए माननीय श्री जीतू पटवारी जी शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इस आदेश को देखने से यह साफ जाहिर है कि कांग्रेस द्वारा भेजे गए आवेदन या प्रेस नोट को ही एसडीएम के आदेश में टाइप कर दिया गया है। जाहिर है एसडीएम ने इसे चेक नहीं किया होगा और आदेश जारी हो गया। फिलहाल यह घंटा फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है।



