जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों और गार्ड्स के बीच हुई झड़प के बाद प्रशासन ने कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य परिसर में बढ़ते तनाव को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शैक्षणिक गतिविधियों में निरंतरता बनाए रखना है।
छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी
जामिया में छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन कई दिनों से जारी है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को पुनः बहाल करने की मांग के साथ पांच छात्र 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इनमें एबिन बेसिल, मोहम्मद जासिम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार और फैजान अली खान शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं, इसलिए वे इसे पुनः शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
सुरक्षा गार्ड्स और छात्रों के बीच हुई झड़प
प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा गार्ड्स और छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें हाथापाई भी हुई। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बातचीत के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों पर हमला किया और उनका टेंट भी हटाया। छात्रों ने मुख्य प्रॉक्टर को पद से हटाने और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग की है। इस घटना ने परिसर में तनाव को और बढ़ा दिया है।
प्रशासन ने कक्षाएं ऑनलाइन मोड में करने का फैसला किया
24 अक्टूबर 2026 को जामिया के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी कोर्सों की कक्षाओं को तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का आदेश जारी किया। प्रशासन ने इसे परिसर की स्थिति के मद्देनजर छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक सत्र को बिना बाधा के जारी रखने के लिए आवश्यक कदम बताया। आदेश अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा और भौतिक कक्षाओं के पुनः शुरू होने की कोई निश्चित तिथि नहीं दी गई है।

ऑनलाइन कक्षाओं के लिए निर्देश और व्यवस्था
विश्वविद्यालय ने सभी डीन, विभागाध्यक्षों, निदेशकों और शिक्षकों को कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में संचालित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, छात्रों को अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। शिक्षकों से कहा गया है कि वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखें और विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षाओं में भाग लें।
छात्रों की मांगों और विरोध का असर
छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्र कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वे मुख्य प्रॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने तथा निलंबित छात्रों के निलंबन वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं। इसके अलावा, परिसर में ‘‘फ्री कश्मीर’’ के नारे लिखे जाने को लेकर विवाद भी सामने आया है, जिसमें छात्रों ने इसे आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश बताया है। इस आंदोलन का असर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
आगे की संभावनाएं और प्रशासन की भूमिका
वर्तमान में प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प चुना है। हालांकि, छात्रसंघ चुनाव को लेकर विवाद और प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों को छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए संवाद स्थापित करना होगा। भविष्य में शैक्षणिक गतिविधियों की पुनः सामान्य स्थिति में वापसी के लिए शांतिपूर्ण समाधान आवश्यक होगा।




