नरसिंहपुर में मध्यान्ह भोजन के बाद 24 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, जिससे जिला अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। यह घटना 3 नवंबर 2026 को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर विकासखंड स्थित ग्राम समनापुर डांगीढाना की शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में हुई।
मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना
नरसिंहपुर में मध्यान्ह भोजन के बाद 24 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, जबकि कुल 38 बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और जी मिचलाने की शिकायत हुई। ये बच्चे कक्षा 6वीं से 8वीं के विद्यार्थी थे। भोजन ग्रहण के तुरंत बाद लक्षण प्रकट होने से यह खाद्य विषाक्तता का संदिग्ध मामला माना जा रहा है।
खाद्य विषाक्तता तब होती है जब दूषित भोजन खाने से शरीर में संक्रमण या जहरीले तत्व प्रवेश कर जाते हैं। इससे उल्टी, पेट दर्द, मिचली जैसे लक्षण सामने आते हैं।
स्कूल और स्थानीय ग्रामीणों ने बच्चों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया
जैसे ही बच्चों की तबीयत बिगड़ी, स्कूल के शिक्षक और आसपास के ग्रामीण सक्रिय हो गए। उन्होंने सभी बीमार बच्चों को तुरंत नरसिंहपुर जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टर्स ने बच्चों का उपचार शुरू कर दिया।
इस तेजी से की गई कार्रवाई से बच्चों की हालत गंभीर होने से बची है। फिलहाल, 24 बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है, जबकि बाकी बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल में जाकर लिया हालचाल
घटना की सूचना मिलते ही नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह और पुलिस अधीक्षक अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों से मुलाकात कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और उपचार में किसी कमी न हो इसका ध्यान रखा।
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और राहत कार्यों में तेजी लाई। उन्होंने तुरंत जांच के निर्देश भी दिए।

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच और सैंपल जांच की प्रक्रिया
स्वास्थ्य विभाग ने मध्यान्ह भोजन के सैंपल और अन्य जांच के लिए मुआयना शुरू किया है। फूड प्वाइजनिंग की पुष्टि के लिए भोजन के नमूने लैब में भेजे गए हैं।
इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, इस बात की भी जांच चल रही है। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
मध्यान्ह भोजन योजना की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल
मध्य प्रदेश में बच्चों के लिए चल रही मध्यान्ह भोजन योजना का मकसद बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है। हालांकि, नरसिंहपुर में यह घटना इस योजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।
पिछले कुछ वर्षों में कई बार मध्यान्ह भोजन में मिलावट, खराब सामग्री और साफ-सफाई की कमी के मामले सामने आए हैं। यह घटना भी इसी क्रम की चिंता बढ़ाती है।
आगे की प्रक्रिया और बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम
प्रशासन ने इस घटना के बाद स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। नियमित जांच और निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी खाद्य सुरक्षा के नियमों से अवगत कराया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। बच्चों और अभिभावकों के लिए भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।



