अरमान मलिक ने ‘मंगल रंग विवाद’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कला का स्वभाव ही विभिन्न व्याख्याओं और अनुभवों को स्वीकार करना है। यह बयान उन्होंने 3 नवंबर 2026 को फिल्म ‘रामायण: राइज ऑफ ए लेजेंड’ के लोकप्रिय गाने ‘मंगल रंग’ के संगीत विवाद के बाद दिया।
‘मंगल रंग विवाद’ की शुरुआत और कारण
फिल्म ‘रामायण’ के ‘मंगल रंग’ गाने को 25 अक्टूबर 2026 को रिलीज़ किया गया था। यह गीत भगवान राम और माता सीता के विवाह प्रसंग पर आधारित है। हालांकि, सोशल मीडिया और संगीत समीक्षकों ने इसके म्यूजिकल अरेंजमेंट में सूफी-कव्वाली और रॉकस्टार के ‘कुन फया कुन’ जैसे तत्वों के प्रयोग पर सवाल उठाए। इस विवाद ने ‘मंगल रंग विवाद’ को सुर्खियों में ला दिया।
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अरमान मलिक ने इस गाने के कन्नड़ संस्करण में अपनी आवाज दी है, इसलिए उनका भी इस विवाद में कनेक्शन बन गया।

अरमान मलिक ने ‘मंगल रंग विवाद’ पर क्या कहा?
अरमान मलिक ने स्पष्ट किया कि संगीत का अनुभव व्यक्तिगत होता है। उन्होंने कहा, “संगीत का अनुभव और उसकी व्याख्या हमेशा व्यक्तिगत (Subjective) होती है, और यही कला की मूल प्रकृति (स्वभाव) है।” उन्होंने बताया कि पूरी टीम का उद्देश्य प्रेम और दिव्यता को सही रूप में दर्शाना था।
मलिक के इस बयान ने विवाद को शांत करने की कोशिश की और कला की विविधता को स्वीकार करने का संदेश दिया।
फिल्म के अन्य संगीत कलाकारों और उनकी भूमिका
हिंदी संस्करण में ‘मंगल रंग’ के बोल डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इसे अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज़ दी है। वहीं, संगीतकार ए.आर. रहमान ने भी इस गाने पर प्रतिक्रिया दी।
रहमान ने कहा, “कुछ चीजें वक्त के साथ निखरती हैं और अपना असली स्वाद दिखाती हैं।” यह बयान संगीत की जटिलताओं और समय के साथ उसके मूल्यांकन को दर्शाता है।

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
इस विवाद ने दर्शकों में संगीत और पारंपरिकता के बीच संतुलन पर बहस छेड़ दी है। ‘मंगल रंग विवाद’ ने यह सवाल उठाया कि क्या आधुनिक संगीत तत्व धार्मिक और सांस्कृतिक कथाओं में उचित हैं।
इस तरह के विवाद आम जनता के लिए कला की समझ को विकसित करने का मौका भी प्रदान करते हैं। वे संगीत को एक नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करते हैं।
आगे क्या हो सकता है ‘मंगल रंग विवाद’ में?
फिल्म और संगीत टीम संभवतः दर्शकों और आलोचकों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए भविष्य में और सावधानी बरतेंगे। इसके अलावा, कलाकारों द्वारा ऐसे विवादों पर खुलकर बातचीत करना आम होता जा रहा है।
इससे संगीत और कला के प्रति व्यापक समझ और सहिष्णुता बढ़ेगी, जो कि भारतीय सांस्कृतिक परिदृश्य के लिए लाभकारी है।
कला में विभिन्न दृष्टिकोणों को स्वीकारना आवश्यक
अरमान मलिक का बयान इस बात पर प्रकाश डालता है कि कला में विभिन्न दृष्टिकोणों को स्वीकारना आवश्यक है। ‘मंगल रंग विवाद’ ने यह दिखाया कि कला की व्याख्या समय, संस्कृति और व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार बदलती रहती है।
इसलिए, कलाकारों का यह कर्तव्य है कि वे अपने काम के प्रति ईमानदार रहें और साथ ही आलोचनाओं को भी सकारात्मक रूप से स्वीकार करें।



