योजना क्रमांक 97 की जमीन मुक्त करने में उलझा प्राधिकरण, शासन ने नामंजूर किया डि-नोटिफिकेशन का प्रस्ताव, तीन माह में जांच के निर्देश

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इंदौर। इदौर विकास प्राधिकरण ने अपनी कई योजनाओं से जमीनें मुक्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसमें विभिन्न योजनाओं की भूमियों, जो अवार्ड में शामिल नहीं है अथवा बोर्ड संकल्प के माध्यम से योजना में सम्पादित नहीं की गई हैं उनका डिनोटिफिकेशन की बात कही गई थी। अब नगरीय प्रशासन विभाग ने प्राधिकरण के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। इसके साथ ही नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को इसकी जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।

नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल ने इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि प्राधिकरण के प्रस्ताव से यह स्पष्ट नहीं है कि योजना क्रमांक 97 से 428.455 हेक्टेयर में से 200.314 हेक्टेयर भूमि कब, क्यों एवं किस अधिकारिता से से मुक्त की गई है। यहां यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्राधिकारी द्वारा भूमि मुक्त करने के लिए अधिनियम, नियम तथा वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं। शुक्ल ने अपने पत्र में लिखा है कि समयसमय पर किए गए उक्त कृत्य प्रथमदृष्टया गंभीर प्रकृति के प्रतीत होते हैं। यह जांच का विषय है। अपर मुख्य सचिव ने आयुक्त सह संचालक, संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को निर्देश दिया है कि इस मामले की विस्तृत जांच हेतु दो सदस्यीय जांच समिति गठित करें। इसमें कोई भी सदस्य संयुक्त संचालक से निम्न स्तर का हो। समिति से तीन माह में जांच प्रतिवेदन देने को कहा गया है।

जमीन मुक्त करने के अधिकार पर सवाल

अपर मुख्य सचिव ने जमीन मुक्त करने पर प्राधिकरण के अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें आईडीए सीईओ का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि 17.06.2025 के प्रतिवेदन अनुसार प्राधिकरण ने नगर विकास स्कीम क्रमांक-97 का वर्ष 1984 में प्रकाशन के बाद समयसमय पर वर्ष 1987 से 1993 के बीच योजना में समाविष्ट कई भूमियों को अनाधिकृत रूप से या तो भूअर्जन हेतु अवार्ड से कम की गई या प्राधिकरण संकल्प द्वारा मुक्त की गई है। प्राधिकरण से प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार नगर योजना क्रमांक-97 की कुल भूमि 428.455 हेक्टेयर में से 200.314 हेक्टेयर भूमि को योजना से मुक्त किया गया है। वर्तमान में योजनान्तर्गत कुल 228.141 हेक्टेयर भूमि शेष है।

41 वर्षों बाद भी योजना का क्रियान्वयन नहीं

पत्र में कहा गया है कि आईडीए द्वारा मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-50 की उपधारा-4 के अधीन इन्दौर निवेश क्षेत्र के ग्रामबिजलपुर, तेजपुर गड़बड़ी, पिपल्याराव एवं हुक्माखेड़ी के लिए नगर विकास योजना क्रमांक-97 का प्रकाशन 01. मई 1984 को किया गया था। इसका राजपत्र में प्रकाशन 08 जून 1984 को किया गया था। नगर विकास योजना प्रकाशन के लगभग 41 वर्ष तक प्राधिकरण द्वारा योजना का क्रियान्वयन पूर्ण नहीं किया गया है।

डीनोटिफिकेशन का प्रावधान नहीं

पत्र के अनुसार आईडीए द्वारा 22 फरवरी 2023 को भेजे प्रस्ताव में डिनोटिफिकेशन की कार्यवाही हेतु आदेश प्रसारित करने का अनुरोध किया गया है। मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 में योजना की भूमियों के डीनोटिफिकेशन का कोई प्रावधान नहीं है। उपरोक्त तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में इन्दौर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधानों के अनुरूप होने के कारण निरस्त कर कोर्ट द्वारा प्रदाय किए गए आदेशानुसार निराकृत किया जाता है।

इन जमीनों का भेजा था प्रस्ताव

1. प्राधिकारी की योजना क्रमांक 97

2. योजना क्रमांक 97-भाग-4

25 वर्ष या उससे अधिक पुरानी योजनाएं

-योजना क्रमांक-126 ग्राम सिरपुर,

-योजना क्रमांक-127 ग्राम पिपल्याराव,

10 प्रतिशत से कम व्यय वाली योजनाएं

-योजना क्रमांक-161 ग्राम सिरपुर, छोटा बागड़दा, गाडराखेड़ी एवं अन्य

-योजना क्रमांक-156 ग्राम सिरपुर

अवार्ड से कम की गई भूमियों वाली योजना

-योजना क्रमांक-103

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