इंदौर। इंदौर के कुमेड़ी स्थित बहुप्रतीक्षित इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पुणे की बीवीजी इंडिया लिमिटेड को मिली है। कंपनी को लीज-कम-ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का ठेका दिया गया है। यह वही कंपनी है, जिसके खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में ब्लैकलिस्टिंग, डिबारमेंट, अनुबंध समाप्त किए जाने और टेंडर से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। खास बात यह कि जब आईएसबीटी की टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, उस अवधि में यह कंपनी पटना में ब्लैक लिस्टेड थी।
जानकारी छुपाकर लिया टेंडर
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उल्लेखनीय है कि टेंडर की शर्तों में सबसे प्रमुख शर्त यह होती है कि टेंडर अवधि के दौरान अगर कोई कंपनी, कहीं भी ब्लैक लिस्टेड है तो व इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकती। बीवीजी ने इन शर्तों का खुले तौर पर उल्लंघन किया है। आईएसबीटी के टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख 10 मार्च 2026 थी। टेक्निकल बिड 12 मार्च 2026 को ओपन हुई। फाइनलेंशियल बिड 17 अप्रैल 2026 को हुई और एलओए 11 मई 2026 को जारी हुआ।
टेंडर शर्तों का खुलेआम किया उल्लंघन
उल्लेखनीय है कि बीवीजी को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद्, पटना ने 6 जनवरी 2024 को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। आईएसबीटी के टेंडर की सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीवीजी को 26 मई 2026 को काली सूची स बाहर किया गया है। इस संबंध में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के प्रशासी पदाधिकारी शिव कुमार राउत ने 26 मई 2026 को आदेश जारी किया था। बीवीजी ने आईएसबीटी के टेंडर लेते समय यह जानकारी छुपाई। इस तरह टेंडर की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन कर उसने टेंडर लिया है।
कई शहरों में बदनाम रही है कंपनी
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीवीजी के खिलाफ पटना, नोएडा और इंदौर में ब्लैकलिस्टिंग/डिबारमेंट की कार्रवाई दर्ज है। इसके अलावा नवा रायपुर में दो साल के टेंडर प्रतिबंध का मामला सामने आया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। मध्यप्रदेश के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों से 2018-19 में कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया था।
पटना में पहले भी ब्लैक लिस्ट हो चुकी है कंपनी
बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन ने 20 दिसंबर 2016 को वीवीजी को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। कंपनी ने इसके खिलाफ पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और ब्लैकलिस्टिंग आदेश रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट के 17 मार्च 2023 के आदेश में इस ब्लैकलिस्टिंग का स्पष्ट उल्लेख है। अदालत ने यह कहते हुए याचिका का निपटारा कर दिया कि ब्लैकलिस्टिंग की अवधि समाप्त हो चुकी थी, इसलिए मामला निष्प्रभावी हो गया। बाद में मध्यप्रदेश से जुड़े एक मामले में भी इस पुराने बिहार ब्लैकलिस्टिंग आदेश का उल्लेख हुआ। अदालत के रिकॉर्ड में यह बात सामने आई कि बीवीजी ने अपने एक टेंडर दस्तावेज में बिहार में हुई डिबारमेंट की पूरी जानकारी नहीं दी थी। कंपनी की ओर से दलील दी गई थी कि पटना हाईकोर्ट से उसे राहत मिली थी।
इंदौर में भी 2021 में हुई थी ब्लैकलिस्टेड
बीवीजी का मध्यप्रदेश में भी ब्लैकलिस्टिंग का रिकॉर्ड सामने आता है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर के कार्यकारी निदेशक ने 16 फरवरी 2021 को बीवीजी को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। यह अवधि 15 फरवरी 2022 को समाप्त हो गई। कंपनी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिस कंपनी को अब इंदौर के महत्वपूर्ण आईएसबीटी के संचालन का ठेका मिला है, उसके खिलाफ इंदौर की ही एक सरकारी कंपनी द्वारा अतीत में ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई हो चुकी है।
मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में भी विवाद
बीवीजी को लेकर मध्यप्रदेश में एक और गंभीर विवाद सामने आ चुका है। दिसंबर 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं एमवाय अस्पताल में बीवीजी की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि कंपनी को 2018-19 के दौरान पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों से ब्लैकलिस्ट किया गया था। विभाग ने जिन कारणों का उल्लेख किया, उनमें PASARA लाइसेंस की कमी, उपकरणों की कमी, पर्याप्त स्टाफ नहीं होना, कर्मचारियों के वेतन में देरी और बायोमेट्रिक सिस्टम का काम नहीं करना शामिल थे।
जयपुर में सेवाओं को लेकर उठे थे सवाल
जयपुर में भी बीवीजी का रिकॉर्ड विवादों से जुड़ा रहा है। जयपुर नगर निगम ने कंपनी को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का काम दिया था। बाद में निगम ने कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी के कामकाज और सेवा को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जयपुर में ब्लैकलिस्ट की गई एजेंसी बीवीजी स्वयं नहीं, बल्कि उसके साथ काम करने वाली स्वतंत्र इंजीनियर एजेंसी थी।
रायपुर का मामला भी अदालत तक पहुंचा था
बीवीजी से जुड़ा एक अन्य विवाद 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने आया। जलगांव नगर निगम के टेंडर से जुड़े मामले में विरोधी पक्ष ने आरोप लगाया था कि बीवीजी को रायपुर की एक सार्वजनिक संस्था ने एक निश्चित अवधि के लिए ब्लैकलिस्ट किया था और टेंडर में इसकी जानकारी छिपाई गई। अदालत के सामने बीवीजी की ओर से कहा गया कि संबंधित ब्लैकलिस्टिंग सीमित अवधि की थी और उस पर अदालत से रोक भी मिली थी।



