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सिंधु जल संधि निलंबित: उमर अब्दुल्ला ने बताया जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे गलत
पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने का बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में संभावित जल संकट की आशंका जताई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य ने कभी भी सिंधु जल संधि का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा, “हमारा हमेशा से मानना रहा है कि सिंधु जल संधि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सबसे गलत है। भारत सरकार ने इस दिशा में जो कदम उठाए हैं, वो महत्वपूर्ण हैं।”
इस निर्णय के तहत भारत ने पाकिस्तान को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की जानकारी दी गई है। यह पत्र जल शक्ति मंत्री की सचिव देबाश्री मुखर्जी द्वारा पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय को भेजा गया।
भारत ने पत्र में सख्त लहजे में कहा है कि, “किसी भी संधि की नींव उस पर सच्ची भावना से अमल करने के दायित्व पर टिकी होती है। लेकिन पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।”
यह निर्णय पहलगाम हमले की जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भारत ने अपनी कड़ी नाराज़गी जताई है।
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