जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन बैन के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन नई जगहें घोषित कर दी हैं। यह बदलाव 11-12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के स्थायी आदेश के तहत हुआ है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया है।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल से हटा कर तीन नए स्थानों को धरना-प्रदर्शन के लिए चुना है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, ट्रैफिक प्रबंधन और राजधानी के मध्य भाग में आम जनता को होने वाली असुविधा को कम करना बताया गया है।
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गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने जंतर-मंतर के आसपास बढ़ते प्रदर्शनों को देखते हुए नए प्रदर्शन स्थलों पर सुझाव दिया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने इस सुझाव को मानते हुए जंतर-मंतर को 33 साल बाद पहली बार प्रदर्शन स्थल से हटाया है।

तीन नए प्रदर्शन स्थल घोषित
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की जगह तीन नए धरना-प्रदर्शन स्थल निर्धारित किए हैं। ये स्थल हैं – रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड। इन स्थानों को प्रदर्शन के लिए उपयुक्त माना गया है और यहां पर प्रदर्शन को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की जाएगी।
रामलीला मैदान सेंट्रल दिल्ली में स्थित है, जबकि बुराड़ी मैदान उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में और सीबीडी ग्राउंड पूर्वी दिल्ली में है। इन जगहों पर प्रदर्शन की अनुमति और व्यवस्था पहले से बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐतिहासिक महत्व
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल का दर्जा 1993 में मिला था। इससे पहले बोट क्लब के लॉन को दिल्ली में प्रमुख प्रदर्शन स्थल माना जाता था। महेंद्र सिंह टिकैत के किसान आंदोलन के बाद यह स्थान आंदोलन का केंद्र बन गया था।
33 साल तक जंतर-मंतर ने अनेक राजनीतिक, सामाजिक और छात्र आंदोलनों की मेजबानी की है। हाल के वर्षों में यहां कई बड़े आंदोलन हुए हैं, जिनमें कॉकरोच जनता पार्टी का 36 दिनों तक चलने वाला धरना भी शामिल है। यह आंदोलन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर आधारित था।

विरोध और आलोचना भी सामने आई
जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन बैन के फैसले को लेकर विपक्षी दलों और संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अन्य विपक्षी समूहों ने भी इस फैसले को चुनौती दी है। उनकी मानना है कि जंतर-मंतर की जगह बदलने से प्रदर्शनकारियों का आवाज़ सरकार तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका की सुनवाई
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन प्रतिबंध और नए आदेश को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। अदालत ने इस याचिका की सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।
इसका मतलब है कि जल्द ही इस फैसले की वैधता और प्रभाव पर न्यायिक समीक्षा होगी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि प्रदर्शन के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
नए आदेश का दिल्लीवासियों और प्रदर्शनकारियों पर असर
जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन बैन से दिल्ली के ट्रैफिक और सुरक्षा पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। इससे केंद्र सरकार और प्रशासन को प्रदर्शन के दौरान बेहतर नियंत्रण मिलेगा।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों को अब नए स्थानों पर जाना होगा। इन जगहों की पहुंच, सुविधाएं और अनुमति प्रक्रिया प्रदर्शन की सफलता को प्रभावित कर सकती हैं। सरकार की ओर से इन स्थानों पर SOP जल्द जारी की जाएगी।



