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भारत में वर्कवीक पर बहस: कितने घंटे काम करना सही? विशेषज्ञों और उद्योगपतियों की राय अलग
देश में सप्ताह में कितने घंटे काम किया जाना चाहिए—इस पर लंबे समय से बहस चल रही है। इस चर्चा में अब WHO की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने लगातार अधिक घंटे काम करने के खतरे को उजागर किया और आराम तथा मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत पर जोर दिया।
“ज्यादा काम, कम उत्पादकता” – डॉ. सौम्या स्वामीनाथन
– हर व्यक्ति की सहनशक्ति अलग होती है, लेकिन शरीर संकेत देता है कि कब उसे आराम की जरूरत है।
– कोविड-19 महामारी के दौरान लंबे समय तक बिना आराम के काम करने से स्वास्थ्यकर्मी बर्नआउट का शिकार हुए।
– “आप कुछ महीनों तक ज्यादा मेहनत कर सकते हैं, लेकिन यह लंबे समय तक संभव नहीं है,” उन्होंने कहा।
– नींद और मानसिक ब्रेक ज़रूरी हैं ताकि कार्य क्षमता बनी रहे।
– उन्होंने स्पष्ट किया कि काम की गुणवत्ता ज्यादा मायने रखती है, न कि सिर्फ लंबे घंटे काम करना।
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