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‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म की रिलीज पर हाई कोर्ट की अस्थायी रोक, केंद्र सरकार के फैसले तक नहीं होगी रिलीज
उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अस्थायी रोक लगा दी है लगाते हुए कहा है कि जब तक केंद्र सरकार जमीअत उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल पुनरीक्षण आवेदन पर फैसला नहीं ले लेती, तब तक फिल्म रिलीज नहीं की जा सकती।

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने इस मामले में अपने रिट अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6 के तहत वैधानिक विकल्पों का उपयोग करना चाहिए।
क्या है धारा 6?
सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6 केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह किसी फिल्म को अप्रमाणित घोषित कर सकती है या उसके प्रदर्शन पर अस्थायी रोक लगा सकती है, यदि यह जनहित में आवश्यक हो।
क्या कहा याचिकाकर्ता ने?
जमीअत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि फिल्म में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक दृश्य हैं। उन्होंने कहा मैंने पूरी फिल्म देखी है और यह पूरी तरह से समुदाय के खिलाफ है। इसमें समलैंगिकता और यौन विकृति दर्शाने वाले दृश्य हैं।”
सिब्बल ने यह भी कहा कि भले ही याचिका खारिज कर दी जाए, लेकिन अदालत को खुद फिल्म देखकर निर्णय लेना चाहिए।
सेंसर बोर्ड की भूमिका
केंद्र सरकार और सेंसर बोर्ड की ओर से बताया गया कि फिल्म निर्माता को फिल्म में 55 कट्स लगाने के निर्देश दिए गए थे, जिनके आधार पर प्रमाणन जारी किया गया।
हाई कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को दो दिनों के भीतर पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जाती है, और सरकार को उस याचिका पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
इस प्रकार, ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज फिलहाल स्थगित कर दी गई है और अब यह केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा कि फिल्म आगे रिलीज हो पाएगी या नहीं।



