पाकिस्तान को कड़ा संदेश: ऑपरेशन सिंदूर से भी बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार भारतीय सेना — राम प्रहार युद्धाभ्यास में शक्ति का प्रदर्शन”
राम प्रहार युद्धाभ्यास के अंतिम दिन पश्चिमी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि पाकिस्तान की किसी भी हिमाकत की स्थिति में भारतीय सेना ऑपरेशन सिंदूर से कहीं बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार है। इस युद्धाभ्यास में सीमा पार कब्जे, नदियों को पार करने और उन्नत सैन्य तकनीकों के उपयोग का गहन अभ्यास किया गया।
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लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन यह संभावित है कि पाकिस्तान फिर से कोई दुस्साहस कर सकता है, जिसके लिए सेना हर परिस्थिति में तैयार है। उन्होंने बताया कि सेना ने नदियों को पार कर दुश्मन के क्षेत्र में प्रवेश और सामरिक स्थलों पर कब्जा करने का अभ्यास किया है, क्योंकि पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी जमीनी कार्रवाई में चिनाब, रावी और सतलुज जैसी नदियां पार करनी होंगी।
उन्होंने बताया कि पश्चिमी कमान की राम डिविजन एक महीने से हरिद्वार के कठिन इलाकों में यह युद्धाभ्यास कर रही है, जिसका मकसद पाकिस्तान की जमीन में घुसकर महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा जमाने की क्षमता को मजबूत करना है।
जनरल कटियार ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम जीत हमेशा जमीन पर ही तय होती है — चाहे 1965 का युद्ध हो या 1971 का। पाकिस्तान हमारी सफलता को तब तक स्वीकार नहीं करेगा, जब तक हम उसकी जमीन पर कब्जा न कर लें।
उन्होंने कहा कि दुश्मन भारतीय सेना की तैयारी देखकर सबक ले—यह सबसे बेहतर स्थिति होगी, अन्यथा इस बार कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से भी बड़ी होगी। गंगा तट से उन्होंने कहा कि हर कार्य से पहले मां गंगा का आशीर्वाद जरूरी है, और सेना को विश्वास है कि यह आशीर्वाद उनके साथ है।
जनरल कटियार ने बताया कि सेना निगरानी और निर्णय क्षमता जैसे क्षेत्रों में भी एआई का उपयोग कर रही है और यह और अधिक बढ़ाया जाएगा। सेना साइबर, रासायनिक, परमाणु और जैविक—हर प्रकार के युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। सबसे बड़ी बात यह कि इस्तेमाल होने वाले अधिकतर उपकरण और ड्रोन स्वदेशी हैं और कई सेना की अपनी कार्यशालाओं में बनाए गए हैं।
इंजीनियर रेजिमेंट की टीमों ने नदी पार कराने वाली सैन्य पुल प्रणाली का लाइव प्रदर्शन किया। मिनटों में पुल की तैनाती और दूसरी ओर आर्टिलरी यूनिटों की तैयारी ने युद्धाभ्यास के दृश्य को बिल्कुल वास्तविक युद्धक्षेत्र जैसा बना दिया—मानो आदेश मिलते ही गोले दागे जा सकते हों।



