दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस पर प्रदर्शन कर रही नेहा बोरा को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई 16 अक्टूबर 2026 को हुई जब नेहा बोरा सेंट्रल पार्क (कनॉट प्लेस) की ओर पैदल मार्च कर रही थीं। नेहा बोरा, जो ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, को पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में शामिल होने के प्रयास के दौरान रोका।
नेहा बोरा की हिरासत और प्रदर्शन का कारण
नेहा बोरा को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और चुनाव आयुक्त नियुक्ति अधिनियम 2023 को वापस लेने की मांग के लिए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। इस प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था। पुलिस ने धारा 163 के तहत प्रदर्शन को निषेध किया था।
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हालांकि मंडी हाउस और कनॉट प्लेस इलाके में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती थी, तब भी प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर सड़कों पर उतरे। पुलिस ने बसों का उपयोग कर नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
अभिजीत दीपके की भी हुई गिरफ्तारी
नेहा बोरा के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को झंडेवालान स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। दीपके तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क की ओर जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया। उन्हें जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
पुलिस ने अभिजीत दीपके को मार्च न निकालने के लिए पहले ही नोटिस दिया था। इसके बावजूद वे प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे। दीपके की गिरफ्तारी के बाद सीजेपी के कई समर्थक तिरंगा लेकर मार्च करते हुए नारेबाजी करते दिखे।
पुलिस ने क्यों रोका प्रदर्शन?
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की थी। इसके तहत किसी भी अप्रूव्ड प्रदर्शन के बिना सार्वजनिक जगहों पर सभा करना प्रतिबंधित है। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से यह कार्रवाई की।
सेंट्रल पार्क को भी 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखा गया। इसके आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई और कई इलाकों में बैरिकेडिंग लगाई गई।
प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत हाल
नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल ने सेंट्रल पार्क को बंद करने का निर्णय लिया। दिल्ली पुलिस ने 6 हजार से अधिक जवानों को तैनात किया। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 220 कंपनियां सुरक्षा में लगीं।
कनॉट प्लेस, राजीव चौक, जंतर-मंतर, पालिका बाजार, और आसपास के मेट्रो स्टेशनों पर कड़ी निगरानी रही। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने धारा 163 के प्रतिबंधों की अवहेलना की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का पूरा प्रयास किया।
नेहा बोरा के समर्थकों का आरोप और प्रतिक्रिया
नेहा बोरा के समर्थकों ने बताया कि उन्हें अकेले हिरासत में लिया गया और अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था, जिससे संपर्क करना मुश्किल हो गया। समर्थकों ने इसे हिरासत नहीं बल्कि अपहरण बताया।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तिरंगे से डरने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे आंदोलन और तेज होगा।
आगे की संभावनाएं और राजनीतिक प्रभाव
दिल्ली में तिरंगा मार्च के दौरान हुई ये गिरफ्तारी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग से जुड़ा है।
आगे भी इस तरह के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई जारी रह सकती है। यह आम जनता के बीच राजनीतिक चेतना और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहस को बढ़ावा देगा।




