उज्जैन में आयुर्वेद छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के मुख्य द्वारों पर ताला लगा दिया। यह घटना 12 अक्टूबर 2026 को आंदोलन के आठवें दिन हुई, जब छात्र अपनी मांगों को लेकर गंभीर हो गए थे।
आंदोलन की शुरुआत और मांगों का विवरण
5 अक्टूबर 2026 से 200 से 300 बीएमएस इंटर्न छात्रों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। छात्रों का कहना है कि वर्तमान में बीएएमएस इंटर्न का मासिक स्टाइपेंड ₹9,383 है, जिसे एमबीबीएस इंटर्न के समान ₹21,500 किया जाना चाहिए।
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यह मांग लंबे समय से चली आ रही है और छात्रों ने इसे लेकर कई सांकेतिक प्रदर्शन जैसे 24 घंटे की भूख हड़ताल और सद्बुद्धि यज्ञ भी किया।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद लिखित आदेश नहीं
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 23 सितंबर 2026 को स्टाइपेंड बढ़ाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, अब तक शासन की ओर से कोई आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। छात्र इस देरी से नाराज हैं और इसे कारण मानकर आंदोलन तेज कर रहे हैं।
इस बीच, दो छात्राओं—डॉ. मुस्कान मंडावत और डॉ. अंजली राठौर—ने 24 घंटे की भूख हड़ताल कर विरोध जताया।
तालाबंदी से अस्पताल सेवाओं पर असर
12 अक्टूबर को कॉलेज और अस्पताल के मुख्य द्वारों पर ताला लगने से अस्पताल पहुंचने वाले डॉक्टर, कर्मचारी और मरीजों को भारी परेशानी हुई। इससे अस्पताल की सामान्य सेवाएं बाधित हो गईं, जिससे मरीजों की समस्याएं बढ़ गईं।
इस स्थिति ने प्रशासन और छात्रों के बीच वार्ता की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है।
आंदोलन के दौरान किए गए अन्य सांकेतिक प्रदर्शन
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर छात्र विभिन्न सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें 24 घंटे की भूख हड़ताल, सद्बुद्धि यज्ञ और समाजसेवा के तहत सामूहिक रक्तदान शिविर शामिल हैं। ये प्रदर्शन छात्रों की गंभीरता और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाते हैं।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि छात्र अपने अधिकारों के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझते हैं।
आम जनता और मरीजों पर प्रभाव
आंदोलन और तालाबंदी के कारण अस्पताल की सेवाएं प्रभावित होने से आम मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज से आए मरीजों को आने-जाने में समय और परेशानी बढ़ गई है।
इसके अलावा, डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी भी अपनी ड्यूटी पूरी करने में बाधित हो रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है।
आगे की संभावित कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका
छात्रों के आंदोलन के चलते प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है। संभावना है कि जल्द ही शासन लिखित आदेश जारी कर स्टाइपेंड बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
इसके अलावा, कॉलेज प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए समस्या का समाधान खोजा जा सकता है, जिससे अस्पताल की सेवाएं पुनः सामान्य हो सकें।



