इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आई़डीए) की वर्षों पुरानी योजनाओं में फंसे जमीन मालिकों की उम्मीदें एक बार फिर 13 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड बैठक पर टिक गई हैं। पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉट धारक समूह ने योजना क्रमांक 171 को अंतिम रूप से निराकृत कर सरकारी गजट में सूचना प्रकाशित कराने की मांग की है। वहीं, योजना क्रमांक 77 को भी डी-नोटिफाई करने की प्रक्रिया शुरू करने का मामला बोर्ड के सामने रखा गया है।
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सितंबर में दोनों ही योजनाओं के प्लॉटधारकों ने आईडीए पर जोरदार प्रदर्शन किया था। उस समय संभागायुक्त एवं आईडीए अध्यक्ष भास्कर लक्षकार तथा सीईओ डॉ.परीक्षित झाड़े ने इन्हें अगली बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को रखने का आश्वासन दिया था। 10 सितंबर को आईडीए सीईओ ने लिखित रूप से आश्वासन दिया था 13 अक्टूबर की बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखा जाएगा।
काफी उलझा हुआ है 13 संस्थाओं का मामला
इन योजनाओं में 13 गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनें उलझी हुई हैं। आईडीए ने कुछ महीनों पहले इन संस्थाओं से विकास शुल्क की राशि जमा कराने को कहा था, उस समय भूमाफियाओं ने जमीनें मुक्त कराने के लिए राशि भर दी थी। कुछ संस्थाओं ने तो दूसरी संस्थाओं के पैसे भी जमा कर दिए थे। तब शिकायतें हुई थीं और जांच-पड़ताल भी हुई।
भूमाफिया चाहते हैं जमीनें मुक्त हों
शहर के कई कुख्यात भूमाफिया इन स्कीमों की जमीनें मुक्त कराने में लंबे समय से जुटे हैं। उनकी कोशिश है कि प्लॉटधारकों को आगे कर वे अपना उल्लू भी सीधा कर लें। खास बात यह कि आईडीए के अफसर भी उन्हें मदद कर रहे हैं।
सीईओ का प्रस्ताव भूमाफिया के पक्ष में
सूत्र बताते हैं कि सीईओ ने इसके लिए जो प्रस्ताव बनाया है, उसके अनुसार सहकारिता विभाग जो सूची देगी उसके आधार पर प्लॉटों का आवंटन कर दिया जाएगा। जबकि, पहले यह तय हुआ था कि सहकारित विभाग जांच कर प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजगा। कलेक्टर राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जांच कर सूची आईडीए को सौंपेंगे।
लोगों को प्लॉट मिले, भूमाफियाओं का न हो फायदा
वर्षों से अपने प्लॉट के लिए भटक रहे लोगों को प्लॉट मिलना चाहिए, लेकिन इसकी आड़ में भूमाफियाओं को फायदा भी नहीं होना चाहिए। सीईओ का जो प्रस्ताव है, उससे साफ-साफ भूमाफियाओं को फायदा होता दिख रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस मामले को निपटाने के लिए कई लाइनजर भी सक्रिय हैं।
वरिष्ठ अधिकारयों को रखनी होगी नजर
इस मामले में पहले भी पूर्व कलेक्टर, पूर्व सीईओ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी कई कार्रवाई कर चुके हैं। इन संस्थाओं तथा इनकी जमीनों को लेकर कई एफआईआर भी दर्ज है। ऐसे में संभागायुक्त, कलेक्टर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इस पर नजर रखनी चाहिए, ताकि किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो।
सीएम को भी धोखे में रख रहा आईडीए
इस मामले में आईडीए सीएम डॉ.मोहन यादव को भी धोखे में रख रहा है। सीएम को यह बताया जा रहा है कि लोग प्लॉट के लिए हल्ला मचा रहे हैं, इसलिए जल्द फैसला लेना होगा। लेकिन, सीएम को यह नहीं बताया जा रहा है कि इस प्रकरण में क्या-क्या खामियां हैं। पहले क्या-क्या हो चुका है।



