उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में लंबे समय से श्रद्धालुओं को दर्शन व्यवस्था को लेकर शिकायत रही है। मंदिर प्रबंध समिति के लगातार प्रयासों के बाद भी कोई खास सुधार नहीं हो रहा। इसका प्रमुख कारण यहां अंगद के पांव की तरह जमे कुछ अधिकारी और कर्मचारी हैं।
रोटेशन ड्यूटी का नहीं होता पालन
मंदिर अधिनियम (मंदिर एक्ट) के नियमों के अनुसार, प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए कर्मचारियों एवं प्रभारियों की ड्यूटी में हर हफ्ते बदलाव (रोटेशन) होना चाहिए। इसके विपरीत, महाकाल मंदिर समिति के कई कर्मचारी और प्रभारी वर्षों से एक ही महत्वपूर्ण स्थान—जैसे सभा मंडप, चांदी द्वार और नंदी हॉल-पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण कार्यप्रणाली में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और नियमों का कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा है।
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ठगे जाते हैं बाहर से आने वाले श्रद्धालु
लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे होने के कारण कर्मचारी और प्रभारी मनमानी पर उतर आते हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से मोटी राशि वसूल कर दर्शन कराने की शिकायतें भी इसीलिए आती हैं। वर्षों से जमे होने के कारण इनकी कोशिश होती है कि सारी व्यवस्था इनके मुताबिक ही चले। इसीलिए नए-नए नियम बनाने का भी कोई फायदा नहीं होता।
नियमों की लगातार हो रही अवहेलना
महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा गर्भगृह और चौखट पर प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम व आदेश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद, पुरोहित समिति से जुड़े कुछ लोग, जो चौखट तक जाने के लिए अधिकृत नहीं हैं, नियमों को ताक पर रखकर नियमित रूप से चौखट तक पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन के स्पष्ट आदेशों की इस तरह खुलेआम अवहेलना प्रबंधन की व्यवस्था और मॉनिटरिंग पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

सुरक्षाकर्मियों हमेशा करते हैं दुर्व्यवहार
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सहायता और सुरक्षा के लिए निजी सिक्योरिटी गार्ड्स और सुरक्षा प्रभारियों को तैनात किया गया है। आए दिन इन सुरक्षाकर्मियों द्वारा दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ अभद्रता, बदतमीजी और अनावश्यक बहस करने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। सुरक्षाकर्मियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया बाबा महाकाल के दर्शन करने आए भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाता है और मंदिर की छवि को धूमिल करता है।
व्यवस्था दुरुस्त करनी है तो दिखानी होगी सख्ती
अगर महाकाल मंदिर की व्यवस्था दुरुस्त करनी है तो मंदिर प्रशासक और प्रबंध समिति को सख्ती दिखानी होगी। ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ एक्शन लेना होगा। यह भी देखना होगा कि आखिर ऐसे कर्मचारी किसके दम पर लंबे समय से एक ही जगह तैनात हैं। अगर अभी से व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो सिंहस्थ में एक बड़ी चुनौती सामने खड़ी होगी।



