मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन को लोकतंत्र और राष्ट्रवाद का आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि अटल जी के विचारों और उनके राष्ट्रवाद के मॉडल को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। यह विचार मुख्यमंत्री ने गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में अटल जी की प्रतिमा के अनावरण के दौरान व्यक्त किए।
अटल बिहारी वाजपेयी का लोकतंत्र और राष्ट्रवाद में योगदान
मोहन यादव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के महान पुरोधा थे। उन्होंने सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए राजनीतिक मर्यादाओं का उदाहरण स्थापित किया। उनकी राजनीतिक शुचिता और विनम्रता ने लोकतंत्र को मजबूती दी। अटल जी का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
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मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अटल जी ने संसद में कहा था कि सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन देश और लोकतंत्र को हमेशा बनाए रखना चाहिए। यह संदेश आज भी प्रासंगिक है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रतिमा अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री के मुख्य संदेश
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण करते हुए मोहन यादव ने उनके राष्ट्रवाद और सुशासन के आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी के व्यक्तित्व में लोककल्याण और राजनीतिक शुचिता की विशेषता थी। यह प्रतिमा समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उन्होंने निजी प्रतिष्ठान के स्वामी त्रिलोकी अग्रवाल का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अटल जी की प्रतिमा लगाकर उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
अटल जी के आदर्शों का प्रभाव आम जनता पर
मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के गांव-गांव को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग योजना शुरू की। यह योजना ग्रामीण विकास और देश के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हुई। उनकी नदियों को जोड़ने की योजना भी सूखे जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक रही।
इस प्रकार अटल जी के राष्ट्रवाद और सुशासन के आदर्श सीधे तौर पर आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने में प्रभावी रहे। उनकी दूरदर्शिता आज भी विकास की राह में मार्गदर्शक है।

राजनीति में शुचिता और मर्यादा की सीख
मोहन यादव ने कहा कि अटल जी ने सत्ता और विपक्ष दोनों की भूमिका को समझते हुए लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया। वे विपक्ष के नेता के रूप में सबसे लंबे समय तक सेवा देते रहे। उनके कार्यकाल में लोकतंत्र की गरिमा बनी और राजनीतिक संवाद का स्तर ऊँचा रहा।
उन्होंने आपातकाल के दौरान जेल में बिताए 19 महीनों का उल्लेख किया, जब अटल जी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया। यह इतिहास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अटल जी के विचारों को अपनाने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में अटल जी के विचारों और राष्ट्रवाद के आदर्शों को अपनाना हर नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अटल जी ने हमें सिखाया कि सत्ता में रहते हुए और विपक्ष में रहते हुए किस तरह के आचरण और मर्यादा का पालन करना चाहिए। यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है।
समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी अटल जी की प्रतिमा
पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कार्यक्रम में कहा कि अटल जी की प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रकाशपुंज है। उन्होंने कहा कि देश को एक सूत्र में पिरोने और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए सभी को अपने कर्त्तव्यों का पालन करना होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि आज भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत है, जो विश्व में चीन और अमेरिका से भी अधिक है। यह विकास अटल जी के राष्ट्रवाद और सुशासन के आदर्शों की सार्थकता को दर्शाता है।



