इंदौर। भाजपा से निष्कासित पार्षद जीतू यादव की घर वापसी तो हो गई है, लेकिन महापौर परिषद से अब भी वे बाहर हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने तो भाजपा में वापसी के दिन ही खेल करते हुए जीतू यादव के विभाग का प्रभार निरंजन सिंह गुड्डू को दे दिया था। अब गेंद नगर अध्यक्ष के पाले में है। वे जब तक नहीं चाहेंगे जीतू यादव एमआईसी में नहीं आ सकते।
उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान मारपीट भी हुई थी। इस मामले ने भाजपा की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। भाजपा संगठन ने तुरंत जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था।
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पुलिस की क्लिन चिट के बाद हुई वापसी
भाजपा संगठन ने तो जीतू यादव को बिना घटनाक्रम की ठीक से जांच-पड़ताल किए ही सिर्फ आरोपों पर पार्टी से बाहर कर दिया था। लेकिन, इस विवाद की जांच में पुलिल के हाथ कुछ नहीं लगा। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया गया था। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस की क्लिन चिट के बाद जीतू यादव की पार्टी में वापसी हुई है।
वापसी के दिन ही हो गया बड़ा खेला
जीतू यादव का निष्कासन समाप्त करने के लिए मंगलवार को प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन ने भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को पत्र लिखा है। इसके पहले ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बड़ा खेला कर दिया। उन्होंने करीब 18 महीने से खाली जीतू यादव के विभाग की जिम्मेदारी निरंजन सिंह गुड्डू को सौंप दी। इसके पीछे महापौर का तर्क था कि काम का नुकसान हो रहा था। यहां बड़ा सवाल यह है कि जब काम का नुकसान हो रहा था, तो यह फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया?
अब नगर अध्यक्ष पर सबकी नजर
अब गेंद पूरी तरह से नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के पाले में है। अगर वे चाहेंगे तभी जीतू यादव की एमआईसी में वापसी होगी। कल इस संबंध में जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव से पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि संगठन जैसा आदेश देगा, वैसा किया जाएगा। जाहिर है जब तक सुमित मिश्रा महापौर को पत्र लिखकर जीतू यादव की वापसी की अनुशंसा नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं होने वाला।
अब देखना होगा क्या करते हैं दादा भक्त?
इस मामले में खास बात यह कि जीतू यादव विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला के समर्थक हैं। मेंदोला की कोशिशों से ही उनकी पार्टी में वापसी हुई है। इधर, सुमित मिश्रा खुद को दादा यानी रमेश मेंदोला का खास समर्थक बताते हैं। नगर अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने में भी दादा का ही हाथ है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि दादा के एक अन्य समर्थक जीतू यादव के लिए सुमित मिश्रा कितनी हमदर्दी दिखाते हैं और कितनी जल्दी महापौर को पत्र जारी करते हैं?



