इदौर। पार्षद जीतू यादव को भाजपा ने फिर से पार्टी में वापस ले लिया है। भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के जिस प्रकरण में उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था, उस मामले में पुलिस उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है। अब सवाल यह कि आखिर हड़बड़ी में किस आधार पर उन्हें पार्टी से निकाला गया था? एक बात और कि अब महापौर परिषद में उनकी वापसी आसान नहीं, क्योंकि आज यानी मंगलवार सुबह ही महापौर ने निरंजन सिंह गुड्डू को जीतू यादव के विभाग का प्रभार सौंप दिया है।
प्रदेश कार्यालय से जारी हुआ पत्र
जीतू यादव का निष्कासन समाप्त करने के लिए प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन ने भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि पार्षद के घर पर हुए हमले में पुलिस जांच में जीतू यादव को क्लीन चिट मिली है। इसके आधार पर यादव का भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से किया गया निष्कासन समाप्त किया जा रहा है।
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संगठन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
जीतू यादव को क्लीन चिट मिलने के बाद अब भाजपा संगठन की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। उन्हें न केवल महापौर परिषद के सदस्य का पद गंवाना पड़ा था, बल्कि पार्टी से भी निष्कासित किया गया था। ऐसे में भाजपा नेता ही सवाल उठा रहे हैं कि बिना गलती आखिर संगठन ने उन पर ऐसी कार्रवाई क्यों की? अब सवाल यह भी है कि क्या जब जीतू यादव की कोई गलती थी ही नहीं तो उन्हें महापौर परिषद में भी शामिल किया जाना चाहिए।
पार्टी में वापसी से पहले ही सियासी चाल
सूत्र बताते हैं कि महापौर और उनकी टीम को यह पता चल गया था कि जीतू यादव की पार्टी में वापसी का पत्र एक-दो दिन में आ सकता है। इसके बाद महापौर ने ताबड़तोड़ आज सुबह ही जीतू यादव के विद्युत और वर्कशॉप विभाग का प्रभार निरंजन सिंह गुड्डू को सौंप दिया। यहां सवाल यह है कि यह पद पिछले करीब डेढ़ साल से खाली पड़ा था, तब महापौर को काम क चिन्ता नहीं हो रही थी। इससे साफ जाहिर है कि जीतू यादव की एमआईसी की राह आसान नहीं है।
महापौर ने कहा-पार्टी जैसा बोलेगी वैसा कर देंगे
इस संबंध में महापौर पुष्यमित्र भार्गव से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि जीतू यादव के पास विद्युत और वर्कशॉप का प्रभार था। चूंकि काम अटक रहे थे तो आज यानी मंगलवार सुबह ही निरंजन सिंह गुड्डू को प्रभार दिया था। अब पार्टी जैसा कहेगी, वैसा कर देंगे।
अब दादा की चाल का है इंतजार
यह सबको पता है कि जीतू यादव विधानसभा दो के विधायक रमेश मेंदोला के खास हैं। उनकी घर वापसी में विधायक मेंदोला का ही हाथ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने समर्थक जीतू यादव को एमआईसी में कैसे वापस लाते हैं। इस घटनाक्रम से इंदौर में सियासत गर्माना तय है।
जीतू यादव को पुलिस ने दी थी क्लीन चिट
भाजपा नेता और एमआईसी सदस्य रहे जीतू यादव को पार्टी ने जिस विवाद में बाहर का रास्ता दिखाया था, उसमें पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के बाद जीतू यादव का नाम पूरक चालान से हटा दिया गया है। पुलिस ने कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि घटना के दौरान जीतू यादव की मौजूदगी या उनकी प्रत्यक्ष भूमिका के प्रमाण नहीं मिले हैं।
जनवरी 2025 का है मामला
उल्लेखनीय है कि जनवरी 2025 में भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हंगामा किया था। इस दौरान मारपीट भी हुई थी। इस मामले ने भाजपा की राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। भाजपा संगठन ने तुरंत जीतू यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था।
घटनास्थल पर मौजूद होने के सबूत नहीं
पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान के अनुसार जांच के दौरान ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिनसे यह साबित हो सके कि जीतू यादव घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने सीधे तौर पर किसी प्रकार की धमकी या अभद्रता की थी। जांच में पार्षद कमलेश कालरा की पत्नी अर्चना कालरा, बेटे दीपेश और अन्य परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार इन बयानों में भी जीतू यादव की घटनास्थल पर मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सीडीआर और मोबाइल लोकेशन निकाली जिसमें यह साबित हुआ कि जीतू यादव मौके पर मौजूद नहीं थे।



