नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को देश में पेपर लीक के बढ़ते मामलों के बीच मोदी सरकार लोकसभा में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश कर दिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह बिल पेश किया। शुक्रवार को सरकार द्वारा इसी सिलसिले में एक ड्रॉफ्ट बिल पहले ही अप्रूल किया जा चुका है।
दो महीने के भीतर पूरी होगी जांच
संशोधित बिल के तहत पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की तैयारी है, इसके अलावा दो महीने के भीतर ही जांच पूरी करने की बात कही गई है। इसके अलावा पेपर लीक के आरोपियों के लिए कम से कम पांच और अधिकतम 10 साल की सजा प्रावधान किया जा रहा है। इसी तरह संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है।
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रिजिजू बोले- जो एमपी चर्चा नहीं चाहते, होगा एक्शन
लोकसभा में सोमवार को पेपर लीक पर रोक लगाने के उद्देश्य से शिक्षा सुधार से जुड़ा अहम विधेयक पेश किया गया। सदन से विधेयक पेश करने की अनुमति मिलने के दौरान विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह हंगामा छोड़कर इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग ले और इसे पारित कराने में सहयोग करे।
किरेन रिजिजू बोले- विपक्ष चर्चा में शामिल हो
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है। उन्होंने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों से अपील करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे की गंभीरता को समझें और विधेयक पर चर्चा में शामिल हों। रिजिजू ने कहा कि सरकार चाहती है कि इस महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा हो और इसे सदन से पारित कराया जाए।
बिल पर चर्चा के लिए युवा बिग्रेड तैयार
भाजपा ने इस बिल पर चर्चा के लिए एक युवा बिग्रेड तैयार कर रखी है। इस बिल पर बीजेपी की तरफ से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या को बोलना था। इनके अलावा एनसीपीआई/टीएमसी के बाग़ियों में सयोनी घोष और मिताली बाग, टीडीपी से लावु श्री कृष्ण देवरायलु, जेडीयू से लल्लन सिंह, शिवसेना से डॉ श्रीकांत शिंदे, एनसीपी से सुनील तटकरे, अपना दल से अनुप्रिया पटेल, लोजपा रामविलास से अरुण भारती आदि भी चर्चा में हिस्सा लेना था। लेकिन, विपक्ष के हंगामे के कारण फिलहाल मामला टल गया।



