अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हुए मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन, वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट और प्रबंधन से जुड़े 14 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें ट्रस्ट महासचिव Champat Rai, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और रामशंकर यादव टिन्नू समेत कई नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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एसआईटी ने पिछले छह दिनों में लगभग 150 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान दानपात्रों की चाबियां एक ही व्यक्ति के पास पाए जाने और वित्तीय प्रक्रियाओं में कई स्तरों पर कमियों के संकेत मिलने की बात सामने आई है। कुछ बयानों में असमानता मिलने के बाद कई लोगों से लगातार पूछताछ भी की गई।
रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण सिफारिशों में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन का प्रस्ताव शामिल है। साथ ही, Kashi Vishwanath Temple की तर्ज पर एक प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की सलाह दी गई है, ताकि मंदिर प्रबंधन अधिक पेशेवर और पारदर्शी तरीके से संचालित हो सके।
एसआईटी की प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं:
• राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन और सभी सदस्यों की स्पष्ट जवाबदेही तय करना।
• प्रशासनिक अधिकारी को CEO के रूप में नियुक्त करना।
• दानराशि की साप्ताहिक ऑडिट व्यवस्था लागू करना।
• प्रतिदिन प्राप्त होने वाले चढ़ावे की डिजिटल और लिखित एंट्री सुनिश्चित करना।
• CCTV डेटा स्टोरेज अवधि 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करना।
• सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना।
• विस्तृत जांच पूरी होने तक प्रमुख जिम्मेदार पदाधिकारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखना।
अब एसआईटी सोमवार से अयोध्या में जांच का अगला चरण शुरू करेगी और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम रिपोर्ट में क्या बड़े खुलासे होते हैं और क्या इस मामले में जवाबदेही तय होगी।
क्या राम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट का पुनर्गठन और CEO व्यवस्था जरूरी है, या मौजूदा सिस्टम में सुधार ही पर्याप्त होगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



