कलेक्टर की सख्ती से क्यूसर हॉक की जमीन के मामले में मॉल माफिया को झटका, आईडीए के नाम दर्ज करने के आदेश

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इंदौर। कलेक्टर शिवम वर्मा की सख्ती से शहर के एक मॉल माफिया को क्यूसर हॉक की जमीन के मामले में बड़ा झटका लगा है। एसडीएम जूनी इंदौर ने इस प्रकरण में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार संस्था और इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की अपील पर अपना फैसला सुना दिया है। फैसले में कहा गया है कि चूंकि इस विवादित भूमि पर अब एमआर 10 बन चुका है और इसके बदले दूसरी योजना में जमीन दी जा चुकी है, इसलिए इस जमीन के भू स्वामी के रूप में आईडीए का नाम दर्ज करने के आदेश दिए जाते हैं।

जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर ने अपने आदेश में लिखा है कि प्रकरण में उपरोक्त विश्लेषण, उभयपक्षों के द्वारा प्रस्तुत तर्को एवं न्यायदृष्टातों के आलोक में आदेशित किया जाता है कि देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर द्वारा प्रस्तुत अपील, गुण-दोष एवं लोकस स्टैंडी के अभाव में, निरस्त की जाती है। इस परिप्रेक्ष्य में यह निर्देशित किया जाता है कि विवादित भूमि पर भूमि स्वामी के तौर पर इंदौर विकास प्राधिकरण का नाम दर्ज किया जाए।

कलेक्टर ने एसडीएम को दिए थे आदेश

क्यूसर हॉक की इस जमीन का मामला काफी पुराना है। शहर के एक मॉल माफिया इस जमीन के साथ लगातार खेलते रहे हैं। वे कई बार इसे बेच और खरीद चुके हैं। पहले किसी और को बेच दी, फिर उससे खरीद ली। फिर किसी दूसरे को बेच कर उससे खरीद ली। जब यह मामला कलेक्टर शिवम वर्मा के संज्ञान में आया तो उन्होंने एसडीएम धनगर के सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

अब देखना यह है कि माफिया जीतता है या आईडीए

चूंकि अब फैसला आईडीए के पक्ष में हो गया है, इसलिए अब सबकी नजर आईडीए पर टिकी हुई है कि वह क्या करता है? क्या आईडीए देवी अहिल्या संस्था को जमीन वापस करेगा?  चूंकि आईडीए पर लंबे  समय से मॉल माफिया का कब्जा है। उसका एक कर्मचारी दिनभर आईडीए में रहकर वहां की पूरी गतिविधियों पर नजर रखता है। ऐसे में शंका है कि आईडीए मॉल माफिया के खिलाफ जा पाएगा।

मॉल माफिया के जेब में सारे अधिकारी

पूरे शहर को यह पता है कि मॉल माफिया के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ कैसे संबंध हैं। अपने मॉल में शॉपिंग कराने से लेकर पार्टी और पिक्चर दिखाने तक मॉल माफिया अधिकारियों की ड्यूटी बजाता है। ऐसे में शंका यह भी जाहिर की जा रही है कि कलेक्टर की सख्ती के बाद भी क्या देवी अहिल्या संस्था के सदस्यों का भला हो पाएगा। क्या संस्था पात्र सदस्यों को भूखंड दे पाएगी?

संस्था ने तहसलीदार के फैसले को दी थी चुनौती

देवी अहिल्या संस्था द्वारा की गई अपील में तहसीलदार जूनी इन्दौर द्वारा पारित 12 अप्रैल 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया था कि ग्राम खजराना स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 85/1, रकबा 0.401 हे. एवं 165/1, रकबा 0.607 हे. का नामांतरण प्रत्यर्थी कंपनी के पक्ष में विक्रय विलेख दिनांक 28.09.2006 के आधार पर स्वीकृत किया गया। पूर्व में इसी भूमि के संबंध में नामांतरण प्रकरण क्रमांक 77/3-6/2006-07, आदेश दिनांक 22/03/2007 से नामांतरण स्वीकृत हुआ था, जिसे अपील क्रमांक 67/ अपील/2009-2010 में दिनांक 05/05/2011 द्वारा निरस्त किया गया। इसके बाद उसी आधार पर नामांतरण आवेदन प्रस्तुत कर वर्तमान आदेश पारित किया गया। इसी भूमि पर बाद में सिविल वाद क्रमांक 130ए/2013 में निर्णय दिनांक 21/08/2015 पारित हुआ, तथा यह भूमि इन्दौर विकास प्राधिकरण इन्दौर योजना क्रमांक 171 में सम्मिलित होकर सड़क एमआर 10 हेतु उपयोग में लाई गई।

आईडीए ने लिखा कि विवादित जमीन पर एमआर 10

आईडीए की अपील में कई तथ्य दिए गए थे। इसमें लिखा था कि विवादित भूमि अर्थात् सर्वे क्रमांक 85/1 पैकी, रकबा 0.401 हेक्टेयर तथा सर्वे क्रमांक 165/1 पैकी, रकबा 0.607 हेक्टेयर, प्रारंभतः योजना क्रमांक 132 का भाग थी। उक्त योजना क्रमांक 132 के लुप्त हो जाने के पश्चात, वर्तमान में उक्त भूमि योजना क्रमांक 171 का भाग है। आईडीए द्वारा एम.आर.-10 रोड (रेडिसन होटल से बायपास तक) का विकास किया गया है, जिसमें उक्त विवादित भूमि सम्मिलित है तथा उक्त सड़क वर्तमान में आमजन द्वारा उपयोग में लाई जा रही है।

इस जमीन के बदले स्कीम 159 में जमीन

आईडीए ने अपनी अपील में लिखा कि प्रतिवादी को योजना क्रमांक 171 में उक्त भूमि के प्राधिकरण में निहित हो जाने के एवज में योजना क्रमांक 159 में भूखंड क्रमांक 7 आवंटित किया जा चुका है। आदेश में कहा गया है कि उक्त भूमि प्राधिकरण में विधिवत निहित हो चुकी है तथा प्रतिवादी को इसके प्रतिकर स्वरूप वैकल्पिक भूखंड आवंटित किया गया है। आईडीए द्वारा वास्तविक विकास कार्य संपादित किया जा चुका है तथा वह वर्तमान में सार्वजनिक उपयोग में है। चूंकि विवादित भूमि के प्राधिकरण में निहित होने के एवज में प्रतिवादी को वैकल्पिक भूमि आवंटित की जा चुकी है, अतः यह न्यायोचित होगा कि राजस्व अभिलेखों में इंदौर विकास प्राधिकरण का नाम दर्ज किया जाए।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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