इंदौर। लोक संस्कृति मंच द्वारा दशहरा मैदान पर आयोजित मालवा उत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने शानदार लोक नृत्य प्रस्तुत किए। गरबा रास, पनिहारी, गोफ रास,अहिराई लाठी, सिद्धि धमाल, गुस्सादी,गेडी, भरतनाट्यम व कत्थक की प्रस्तुति ने लोगों को लुभाया।
लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि शिल्प में विभिन्न राज्यों की कलाकृतियां आई हैं। यहां छत्तीसगढ़ के ब्लैक आयरन शिल्प की कलाकृतियां भी मिल रही हैं। राजस्थान के खूबसूरत ब्लैक पॉटरी, रीवा का बांस शिल्प एवं असम, मिजोरम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर से आए हुए हस्तशिल्प देखने योग्य हैं। छत्तीसगढ़ का ब्रास शिल्प भी यहां पर मौजूद है, वही नागालैंड का ड्राई फ्लावर, उत्तर प्रदेश के कालीन महेश्वर की माहेश्वरी साड़ियां भी यहां उपलब्ध हैं। लगभग 300 से अधिक शिल्पकार अपनी कला यहां पर प्रदर्शित करने एवं बनाए गए उत्पाद विक्रय करने आए हैं।
चटकी चुमकीली हो चंदा पर पनिहारी नृत्य
लोक संस्कृति मंच के दीपक लवंगडे एवं सतीश शर्मा ने बताया कि गुरुवार को मालवा उत्सव में स्वाति उखले एवं साथियों ने “चटकी चुमकीली हो चंदा’ , बोल पर पनिहारी नृत्य प्रस्तुत किया। गुजरात का गोफ रास सौंदर्य प्रधान छठा प्रस्तुत कर गया । कलाकार ने गोफ की सहायता से नृत्य को प्रस्तुत किया। स्थानीय कलाकारों में श्री कृष्ण अवतार की सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। भरतनाट्यम के माध्यम से वर्धा कला संस्थान ने प्रस्तुत किया, वही रामायण की प्रस्तुति अपूर्व हर्षित गुप्ता के निर्देशन में की गई।
गोवा का लोकनृत्य देख मंत्रमुग्ध हुए लोग
श्वेता श्रीवास्तव एवं साथियों द्वारा भामाशाह नाटिका का प्रस्तुतीकरण हुआ शिवम नृत्य कला केंद्र द्वारा चार युगों की गाथा पंडित मयंक शर्मा के निर्देशन में ध्रुवी मेहता और साथियों ने जब प्रस्तुत की। छत्तीसगढ़ से आए कलाकारों द्वारा गेडी नृत्य प्रस्तुत किया गया। गोवा अपनी समृद्ध संस्कृति और लोक कलाओं के लिए प्रसिद्ध है। उन्हें लोक कलाओं में से एक है कलशी फुगड़ी यह एक पारंपरिक मनमोहन लोक नृत्य है। धार्मिक उत्सव त्योहार पर महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसमें महिलाएं रंग-बिरंगे वस्त्र पहनकर खूबसूरत नृत्य करती हुई दिखाई दी जिसमें उन्होंने गोल घेरा बनाकर लय ताल के साथ मंत्र मुग्ध कर दिया। वही तलवार रस में गुजरात के कलाकारों ने तलवार कला का प्रदर्शन किया । गुजरात के कलाकारों द्वारा सिद्ध धमाल नृत्य भी प्रस्तुत किया गया जिसमें उनका कॉस्टयूम एवं मेकअप अफ्रीकन कलचर की याद दिलाता था।अहिराई लाठी नृत्य भी प्रस्तुत किया गया।


