नई दिल्ली। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने रविवार को अपना इस्तीफा दे दिया है। एन बिरेन सिंह ने आज ही दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। शाम को उन्होंने राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंपा। इस अवसर पर कई विधायक और मत्री उपस्थित थे। नए मुख्यमंत्री पर फैसला एक–दो दिन के भीतर लिया जाएगा।
बीरेन सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा कि अब तक मणिपुर के लोगों की सेवा करना सम्मान की बात रही है। मैं केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं। उन्होंने समय पर कार्रवाई की, मदद की और विकास के काम किए। हर मणिपुरी के हितों की रक्षा के लिए कई परियोजनाएं भी चलाईं। मेरा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह इसी तरह काम करती रहे। इस्तीफा देते समय उनके साथ प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ए शारदा, बीजेपी के उत्तर पूर्व मणिपुर प्रभारी संबित पात्रा और करीब 19 विधायक मौजूद थे। बताया जा रहा है कि थोड़ी देर में वहां विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें पार्टी हाईकमान से बात करके नया नेता चुना जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि बीरेन सिंह पर राज्य में 21 महीने से जारी हिंसा के चलते काफी दबाव था। विपक्षी पार्टियां भी लगातार एनडीए से इस मुद्दे पर सवाल पूछ रही थीं। गवर्नर ने अभी बीरेन सिंह से कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर पद संभालने के लिए कहा है। इस्तीफे का फैसला लेने से पहले बीरेन सिंह ने रविवार सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी। इसके बाद शाम को राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया।
हिंसा के लिए मांगी थी माफी
पिछले साल के अंत में बीरेन सिंह ने राज्य में हुई हिंसा और उसमें हुई जनहानि को लेकर माफी मांगी थी। बीरेन सिंह ने कहा था कि पूरा साल बहुत दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। इसका मुझे बहुत दुख है। 3 मई 2023 से लेकर आज तक जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए मैं राज्य के लोगों से माफी मांगता हूं।
2023 से जारी है हिंसा
मणिपुर में 3 मई 2023 से कुकी–मैतेई समुदाय के बीच हिंसा जारी है। मैतेई–कुकी समुदाय के बीच भड़की हिंसा को 600 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं। सीएम ने खुद ही बताया था कि मणिपुर में मई 2023 से अक्टूबर 2023 तक गोलीबारी की 408 घटनाएं दर्ज की गईं। नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक 345 घटनाएं हुईं। मई 2024 से अब तक 112 घटनाएं सामने आई हैं।
विपक्ष ने कहा– काफी देर कर दी
मणिपुर से एनपीएएफ पार्टी के सांसद लोरो फोज ने कहा कि एन बिरेन सिंह अपने विधायकों को समर्थन खो चुके थे। उन्होंने लेट से इस्तीफा दिया। अगर वे डेढ साल पहले इस्तीफा देते तो मणिपुर बच जाता। वहां के छात्रों का जीवन बच जाता। मणिपुर का जो नुकसान हुआ वो एन बिरेन सिंह से इस्तीफे से ठीक नहीं होगा।



