👉 यह भी पढ़ें:
- Sonam Raghuvanshi की जमानत बरकरार, मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका की खारिज
- मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, कोर्ट ने कहा-नामांकन खारिज होने के बाद सुनवाई हुई तो नई परंपरा होगी
- सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज, सीजेआई सूर्यकांत ने दिलाई शपथ, जानें अब कितनी हुई जजों की संख्या
- ट्विशा शर्मा केस में बड़ा मोड़: हाई कोर्ट ने सास की अग्रिम जमानत रद्द की, CBI कार्रवाई का रास्ता साफ
- सोनम रघुवंशी को शिलॉन्ग कोर्ट से मिली जमानत, राजा रघुवंशी के भाई ने इसे पैसे की ताकत बताया
- भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस सूर्यकांत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ
0:00 left
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पर रिहाई का आदेश दे दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रोफेस को जमकर फटकार भी लगाई। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए पोस्ट में प्रोफेसर ने जो बातें लिखी हैं, उसे डॉग व्हिसलिंग कहते हैं। उन्होंने प्रोफेसर से पूछा है कि उन्हें इस चीप पब्लिसिटी की क्या जरूरत थी।
उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर ने भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। रविवार को प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार को जिला अदालत ने 27 तक अली खान को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का फैसला सुनाया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आतंकी आकर हमारे देश पर हमला करके चले जाते हैं और आपको इस चीप पॉप्यूलेरिटी की जरूरत है। हर किसी को स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है…. लेकिन क्या ये समय है इन सबके बारे में बात करने का? देश पहले ही किस दौर से गुजर रहा है। कुछ आतंकी हमारे देश में आए और लोगों पर हमला कर दिया… हमें एकजुट होने की जरूरत है। ऐसे समय में ऐसी चीप पॉप्युलेरिटी की आवश्यकता थी?



