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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर अब भारत में एलपीजी सिलेंडरों पर दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत हो गई है। कमर्शियल सिलेंडर में तो और भी परेशानी है, जिसके कारण बेंगलुरु सहित कई शहरों के रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) एस्मा लागू कर दिया है।
सरकार ने घरेलू खाना पकाने की गैस की बिना बाधा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) लागू किया है। सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में मोड़ने का निर्देश दिया है। एस्मा एक ऐसा एक्ट है, जिसे कुछ सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ये सेवाएं लोगों के सामान्य जीवन से जुड़ी हैं और इनके प्रभावित होने का सीधा असर आम जनता को पड़ता है। इसमें सार्वजनिक परिवहन (बस सेवाएं), स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर और अस्पताल) जैसी सेवाएं शामिल हैं।
एस्मा के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश
सरकार ने एस्मा लागू करते हुए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और वितरण की प्राथमिकता तय की है। पहली प्राथमिकता पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक घरेलू गैस ( पीएनजी ) और वाहनों के लिए सीएनजी की दी गई है, इन्हें 100 फ़ीसदी गैस उपलब्ध करवाना पहली प्राथमिकता होगी। दूसरी प्राथमिकता फर्टिलाइजर का उत्पादन करने वाली प्लांट को दी गई है। इन प्लांटों को पिछले छह महीनों की औसत ज़रूरत का 70 फ़ीसदी गैस उपलब्ध करवाना अनिवार्य होगा।
कई स्थानों पर एलपीजी के लिए लंबी कतारें
घरेलू गैस की किल्लत की खबरो के बीच महाराष्ट्र के कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर पाने के लिए लंबी कतारों में लगे हैं। रत्नागिरी और कोल्हापुर में लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इसके अलावा देश के कई स्थानों से भी गैस की किलल्त की खबर आ रही है। न हो.
इन सेक्टर्स में होगी गैस की कटौती
केंद्र सरकार इंडस्ट्री से जुड़े सेक्टरों के हिस्से में गैस कटौती करेगी। इनको पिछले औसत यूज के आधार पर कम गैस मिलेगी यानी बीते कुछ महीनों में किसी कंपनी ने जितनी भी गैस इस्तेमाल की होगी, उसका कुछ ही प्रतिशत दिया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि देश में एलपीजी का स्टॉक अभी 40 दिनों के लिए काफी है। साथ ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से अल्टरनेटिव इंपोर्ट बढ़ाया जा रहा है, लेकिन अगर संकट लंबा चला तो असर पड़ेगा।



