मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। US-Iran Conflict के बीच अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान की कई महत्वपूर्ण सैन्य साइट्स पर जवाबी हमला किया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंकाएं तेज हो गई हैं।
अमेरिकी सेना की कमान संभालने वाले United States Central Command (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सप्ताहांत में ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार और ड्रोन कंट्रोल साइट्स को निशाना बनाया गया।
👉 यह भी पढ़ें:
- भारत है ताकतवर सैन्य शक्ति’ — अमेरिकी रक्षा मंत्री ने की तारीफ, रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने का ऐलान
- भारत पर अमेरिका का बड़ा दांव: जितनी चाहिए उतनी ऊर्जा देंगे, रुबियो के दौरे से पहले बड़ा ऐलान
- युद्धविराम के बीच फिर बरसी मौत: दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों से मातम
- अमेरिका की ईरान को खुली चेतावनी, बोले ट्रंप — समय हाथ से फिसल रहा है
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। दरअसल, इससे पहले ईरान ने एक अमेरिकी MQ-1 Drone को मार गिराने का दावा किया था। ईरान का आरोप था कि ड्रोन उसके समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर गया था और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा था।
ड्रोन गिराए जाने के बाद अमेरिकी लड़ाकू विमान तुरंत सक्रिय हो गए। अमेरिकी सेना के अनुसार हमले में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो ड्रोन को नष्ट कर दिया गया। अमेरिका ने दावा किया कि ये सैन्य संसाधन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से गुजर रहे जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे।
इस घटनाक्रम ने Middle East Tension, वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या यह केवल सीमित सैन्य कार्रवाई है या फिर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संकट की ओर बढ़ रहा है?
आपको क्या लगता है? क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव जल्द थम जाएगा या यह मध्य पूर्व में एक बड़े संघर्ष का संकेत है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।


