Iran-US Peace Deal के बाद ईरान का बड़ा दावा! ‘अमेरिका और इजराइल को झुकने पर किया मजबूर’, समझौते पर देश के भीतर भी मचा बवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम तथा शांति समझौते की घोषणा के बाद मध्य पूर्व की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर जहां दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना ने ऐसा दावा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।

ईरान के सैन्य मुख्यालय ने सोमवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि युद्ध के दौरान ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिका और इजराइल को “पीछे हटने” और “हार स्वीकार करने” के लिए मजबूर कर दिया। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित इस बयान में कहा गया कि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता, रणनीतिक शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए विरोधी देशों को झुकने पर मजबूर किया।

बयान में दावा किया गया कि युद्ध के दौरान ईरानी बलों के दबाव के कारण विरोधियों के पास पराजय स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की गई है।

ईरानी मीडिया बता रहा ‘जीत’, बढ़ रहा अंदरूनी विरोध

ईरानी सरकारी मीडिया इस समझौते को देश की कूटनीतिक और सैन्य जीत के रूप में पेश कर रहा है। सरकारी टेलीविजन और अन्य मीडिया मंचों पर यह संदेश दिया जा रहा है कि ईरान ने दबाव के बावजूद अपने हितों की रक्षा की और अंततः विरोधी पक्ष को समझौते की मेज तक आने के लिए मजबूर किया।

हालांकि, देश के भीतर इस समझौते को लेकर मतभेद भी सामने आने लगे हैं। कट्टरपंथी धड़ों और कुछ राजनीतिक समूहों ने समझौते पर सवाल उठाए हैं और इसे लेकर सरकार की आलोचना तेज हो गई है।

विदेश मंत्री और संसद अध्यक्ष पर लगे गंभीर आरोप

समझौते का विरोध करने वाले कुछ समूहों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और संसद अध्यक्ष  गालिबाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आलोचकों का कहना है कि दोनों नेताओं ने अमेरिका के साथ बातचीत कर देश की मूल नीतियों से समझौता किया है।

अरागची और गालिबाफ उन प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने अमेरिका के साथ वार्ता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही कारण है कि समझौते के विरोधी गुटों का निशाना भी वही बने हुए हैं।

युद्ध की यादें अभी भी ताजा 

यह पूरा विवाद उस युद्ध की पृष्ठभूमि में सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था। संघर्ष के शुरुआती चरण में हुए हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था और दुनिया को व्यापक युद्ध की आशंका सताने लगी थी।

अब जबकि संघर्ष विराम और शांति समझौते की घोषणा हो चुकी है, दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से इसे प्रस्तुत करने में जुटे हैं। जहां ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इस समझौते के वास्तविक प्रभाव और भविष्य की स्थिरता पर नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में यह साफ होगा कि यह समझौता केवल अस्थायी राहत है या वास्तव में मध्य पूर्व में लंबे समय तक शांति की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।

आपकी राय क्या है?
क्या ईरान का यह दावा कि उसने अमेरिका और इजराइल को झुकने पर मजबूर किया, वास्तविकता है या घरेलू राजनीति को साधने की रणनीति?

कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं। क्या यह शांति समझौता मध्य पूर्व में स्थायी शांति लाएगा या आने वाले समय में फिर नया तनाव देखने को मिल सकता है? 

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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