दुनिया की नजरें एक बार फिर अमेरिका-ईरान तनाव पर टिक गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने वाली ऐतिहासिक पीस डील (Peace Deal) पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों में हलचल बढ़ा दी है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा, “समझौते पर कल हस्ताक्षर होने वाले हैं और जैसे ही यह डील साइन होगी, Strait of Hormuz सभी के लिए खोल दिया जाएगा।” इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें बढ़ गईं कि मध्य पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
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हालांकि ट्रंप के दावे के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने अलग संकेत दिए। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइलबकाई ने साफ कहा कि रविवार को किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, वार्ता जारी है लेकिन कई मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।
इस बीच पाकिस्तान, जो इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, ने दावा किया है कि समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आखिरी चरण में पहुंच चुकी है और अगले 24 घंटे के भीतर कोई बड़ी घोषणा हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने हाल ही में कहा था कि समझौते पर “आने वाले दिनों” में हस्ताक्षर संभव हैं। वहीं एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार डील होने की संभावना 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

गौरतलब है कि Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था सीधे प्रभावित होती हैं।
अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। इसी बीच हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच फिर से सैन्य तनाव बढ़ने से पूर्ण युद्ध की आशंकाएं भी गहरा गई थीं।
अब सवाल यह है कि क्या ट्रंप का दावा सच साबित होगा, या फिर एक बार फिर शांति वार्ता आखिरी मोड़ पर आकर अटक जाएगी?
सबसे बड़ा सवाल
क्या Iran-US Peace Deal वास्तव में Middle East में स्थायी शांति ला पाएगी, या यह केवल अस्थायी युद्धविराम साबित होगी?
आपकी क्या राय है? क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों को स्थिर कर पाएगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



