नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ड्राफ्ट नियमों को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति पर यूजीसी के मसौदा नियम आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश है। इसका उद्देश्य देश पर ‘एक इतिहास, एक परंपरा, एक भाषा‘ थोपने का अपना एजेंडा है।
राहुल गांधी ने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य देश के अन्य सभी इतिहास, संस्कृतियों और परंपराओं का उन्मूलन करना है। यूजीसी के मसौदा नियम इसका शुरुआती बिंदु हैं। वे यही हासिल करना चाहते हैं। यह एक तरह से संविधान पर खुले हमले की तरह है। अलग–अलग राज्यों की शिक्षा प्रणाली के साथ छेड़–छाड़ की जो कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी परंपराएं अपना इतिहास और भाषा होती है। मैं हमेशा कहता हूं कि संविधान में, भारत को ‘राज्यों का संघ‘ कहा जाता है, इसका मतलब है कि ये सभी इतिहास, परंपराएं, भाषाएं एक साथ मिलकर भारत को राज्यों का संघ बनाती हैं और इसलिए हमें इसके बारे में इसी तरह सोचना होगा। हमें सभी भाषाओं, सभी संस्कृतियों, सभी परंपराओं, सभी इतिहासों का सम्मान करना होगा और हमें समझना होगा कि वे कहां से आ रहे हैं।
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा–आरएसएस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे राज्य सरकारों की सारी शक्ति अपने हाथ में लेना चाहते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि वे राजनेताओं को उद्योगपतियों का नौकर बनाना चाहते हैं। हम कभी भी नई शिक्षा नीति का समर्थन नहीं कर सकते।
दक्षिण के कुछ राज्य कर रहे हैं इसका विरोध
दक्षिण के गैर भाजपाई राज्यों खास तौर पर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक यूजीसी के मसौदा नियमों के खिलाफ हैं। उनता तर्क है कि ये नियम राज्य की स्वायत्तता को कम करते हैं। उनका दावा है कि नियम विश्वविद्यालय प्रशासन पर राज्य सरकार के प्रभाव को कम करते हैं, खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर उनका विरोध है। बता दें कि इस समय कुलपति की नियुक्ति में राज्य सरकारों की भी अहम भूमिका होती है, लेकिन नए नियमों में यह शक्ति केंद्रीय प्राधिकरण को दी गई है।


