संगठन में कसावट के लिए कल भोपाल आ रहे राहुल गांधी, क्या मध्यप्रदेश में कांग्रेस को दे पाएंगे संजीवनी?

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भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कल यानी मंगलवार को भोपाल आ रहे हैं। यहां वे संगठन सृजन अभियान की शुरुआत करेंगे। वे कांग्रेस संगठन में कसावट के उद्देश्य से मध्यप्रदेश आ रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या उनका यह दौरा कांग्रेस की गुटबाजी दूर कर पाएगा? क्या राहुल मध्यप्रदेश में बुरी तरह खत्म हो चुकी कांग्रेस को फिर से जीवित कर पाएंगे?

राहुल गांधी कल सुबह 11:00 से 12:00 बजे तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में राजनैतिक मामलों की समिति की बैठक में हिस्सा लेंगे। इसमें प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं द्वारा राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद दोपहर 12:00 से 12:30 बजे तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में ही सांसदों एवं विधायकों के साथ उनके क्षेत्रों की समस्याओं और जनता की अपेक्षाओं पर चर्चा करेंगे। दोपहर 12:30 से 01:30 बजे तक कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों एवं नव सृजित प्रदेश कांग्रेस द्वारा नियुक्त प्रभारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद दोपहर 02:30 से 04:00 बजे तक वे रविंद्र भवन सभागार में कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधि, प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि, जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं ब्लॉक अध्यक्षों के अधिवेशन में शामिल होंगे।

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गुजरात के तर्ज पर बदलाव की तैयारी

राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत गुजरात से की थी। अब यही प्रयोग मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। इसके तहत दिल्ली से हर जिले के लिए दूसरे राज्य के किसी सीनियर लीडर को एमपी में ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। दिल्ली से 61 ऑब्जर्वर के साथ एमपी कांग्रेस भी हर जिले के लिए 4-4 सहयोगी पर्यवेक्षक नियुक्त करेगी। 5 लोगों की टीम एक जिले में जाकर कांग्रेस के जमीनी हकीकत जानेगी।

भाजपा को फायदा पहुंचाने वाले होंगे बाहर

संगठन सृजन अभियान के दौरान कांग्रेस के सभी ऑब्जर्वर और कोऑब्जर्वर आवंटित जिले में जाकर ये पता लगाएंगे कि कांग्रेस किस विधानसभा में कैसे मजबूत है। कांग्रेस के साथ जुडे़ पुराने कांग्रेसियों की लिस्ट भी तैयार होगी। इस दौरान ऐसे नेताओं की लिस्ट भी तैयार की जाएगी जो भाजपा के करीबी हैं और कांग्रेस में रहकर भीतरघात कर रहे हैं। ऑर्ब्जवर संगठन सृजन अभियान के तहत अपने आवंटित जिले में कांग्रेस जिला अध्यक्ष के लिए मजबूत कार्यकर्ताओं के नाम छांटकर उनका एक पैनल भी बनाकर दिल्ली भेजेंगे।

राहुल की इस कवायद का क्या होगा फायदा

बड़ा सवाल यह है कि राहुल गांधी की इस कवायद का मध्यप्रदेश कांग्रेस पर क्या असर पड़ने वाला है। पहले से ही गुटों-गुटों में बंटी कांग्रेस विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद पूरी तरह तहस-नहस हो चुकी है। पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सेंध मारी, इसके बाद पिछले विधानसभा चुनाव में कई बड़े नेता अपने समर्थकों के साथ भाजपा की शरण में पहुंच गए। अब जो कांग्रेस बची है, उसमें भी एकजुटता नहीं है और न ही कोई ऐसे प्रयास दिखाई दिए हैं जिससे कांग्रेस को अपने पैरों पर खड़ा किया जा सके।

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