नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने एक और बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) के तहत पाकिस्तान और पीओके में रह रहे 23 लोगों को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार ये सभी भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों, भर्ती, घुसपैठ, टेरर फंडिंग, हथियारों की तस्करी और आतंकी नेटवर्क को लॉजिस्टिक सहायता देने में शामिल रहे हैं। इन नए नामों के जुड़ने के बाद अब घोषित व्यक्तिगत आतंकवादियों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
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सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े
गृह मंत्रालय ने शनिवार को जारी कई अधिसूचनाओं में बताया कि घोषित किए गए 23 लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) से जुड़े हैं। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 10 लोग JeM और 13 LeT से संबद्ध हैं। कुछ के TRF और JuD से भी संबंध हैं।
11 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी
अधिसूचना के अनुसार घोषित किए गए 23 लोगों में 11 मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं, जबकि शेष पाकिस्तानी नागरिक हैं। इनमें से सात जम्मू-कश्मीर निवासी वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीररह रहे हैं, जबकि चार पाकिस्तान में रह रहे हैं। पीओके में रह रहे सात लोगों की पहचान मसूद इलियास कश्मीरी (रावलकोट), मुफ़्ती मुहम्मद असग़र खान (अब्बासपुर), हाफ़िज़ अब्दुल शकूर (कोटली), अब्दुल्ला जिहादी (कुंडलशाही, नीलम), गुलाम फ़रीद (बडिंग, बिंबर), बिलाल अहमद मीर (सोपोर, वर्तमान में मुज़फ़्फ़राबाद) और आबिद क़य्यूम लोन (बारामूला, वर्तमान में PoK) के रूप में की गई है।
पाकिस्तान में रह रहे चार भारतीय
पाकिस्तान में रह रहे चार लोगों में अनंतनाग के हारून रशीद गनई, डोडा के नज़ीर अहमद गुज्जर, पुलवामा के ओवैस फ़रोज़ मीर और मोहम्मद शहीद फैसल शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार फैसल मूल रूप से बेंगलुरु का है और उसका भारतीय पता दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वे रावलपिंडी में रह रहा है।
सरकार ने लगाए हैं कई आरोप
गृह मंत्रालय के अनुसा सभी लोग आतंकवादियों की भर्ती और प्रशिक्षण, जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराने, आतंकी हमलों की योजना बनाने, ड्रोन और सीमा-पार नेटवर्क के जरिए हथियार एवं गोला-बारूद पहुंचाने, टेरर फंडिंग, लॉजिस्टिक्स संभालने और आतंकी शिविरों के संचालन में शामिल रहे हैं। सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद के कई सदस्यों का संबंध वर्ष 2016 में नगरोटा आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले और वर्ष 2022 में सुरक्षा बलों पर हुए सुंजवान हमले से भी जोड़ा है।



