पार्टी में चल रहे हो–हल्ले के कारण करीब 10 महीने बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बड़ी मेहनत से अपनी कार्यकारिणी बनाई थी। सूची सामने आते ही इतना हंगामा मचा की पटवारी की बोलती बंद हो गई। कई नेताओं ने इस्तीफे दे दिए, इसके बाद एक दूसरी सूची जारी हुई। फिर भी विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा।
कार्यकारिणी घोषित होते ही सबसे पहला रिएक्शन पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद टंडन का आया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में जाकर वापस कांग्रेस आए टंडन को उम्मीद थी कि उन्हें कोई अच्छा पद मिलेगा। जब नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस से ही इस्तीफा दे दिया। कई जगह से विरोध के सुर उठने लगे लगे थे। प्रदेश प्रवक्ता रवि सक्सेना के एक फेसबुक पोस्ट भी खूब चर्चा रही। सक्सेना ने इसमें लिखा था कि पुरानी कहावत है, जो आज चरितार्थ हो गई। अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपनों को दे। जिन्हें जनता ने पराजित किया वही बने भाग्य विधाता।
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इसके बाद विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भी खुलकर सामने आ गए, उन्होंने यहां तक कह डाला कि कुछ नेताओं के इशारे पर यह सूची तैयार की गई है। पहली सूची से कमलनाथ के बेटे नकूलनाथ का नाम गायब होना भी चर्चा का विषय बना था और भाजपा भी कांग्रेस पर हमले करने लगी थी। पहली सूची में पटवारी ने दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह को उपाध्यक्ष बनाया था। इस पर कांग्रेस के ही नेता कहने लगे थे कि पटवारी ने गुरु दक्षिणा चुकाई है।
बढ़ते विवाद के बाद पटवारी ने विरोध करनेवाले अजय सिंह को दूसरी सूची में शामिल कर लिया। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को भी जगह दे दी। कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में 25 सदस्यीय पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें कई नेताओं को एडजस्ट किया गया। लेकिन पटवारी की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही। दूसरी सूची मंगलवार रात को जारी हुई और बुधवार को पांच नेताओं ने पद ठुकरा दिया। इनमें भोपाल कांग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष मोनू सक्सेना, इंदौर के अमन बजाज, मुरैना के रामलखन दंडोतिया, रैगांव की पूर्व विधायक कल्पना वर्मा और यासिर हसनत सिद्धीकी शामिल हैं। इसके साथ अगर प्रमोद टंडन को भी शामिल कर लें तो पद ठुकराने वाले 6 नेता हो गए हैं।
यहां सवाल यह है कि ऐसे समय में जब कांग्रेस को प्रदेश



