प्रदेश के काबिना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की सीएम के नाम लिखी एक चिट्ठी मीडिया में क्या पहुंची, एमपी की सियासत में हंगामा बरप गया। सबने कहा इंदौर के बहाने मंत्रीजी ने चिट्ठी में अपना पूरा दर्द उड़ेल दिया है। जब सियासत गरमा गई तो मंत्रीजी ने चिट्ठी लिखने से ही इनकार कर दिया।
सच तो यह है कि इस कथित चिट्ठी में लिखे हर शब्द मंत्रीजी का दर्द बयां कर रहे हैं। इंदौर के कंधे पर चलाई इस बंदूक की गोली के निशाने पर सीएम डॉ. मोहन यादव हैं। भाजपा के ही लोग कह रहे हैं कि ऐसी चिट्ठी कोई और लिख ही नहीं सकता। एक तो कोई आपके जैसा ‘हिम्मती’ नहीं और दूसरा पिछले ढाई साल में जो दर्द आपने झेला है, इस चिट्ठी में उसी का तो जिक्र है।
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मंत्रीजी, आपका दर्द इंदौर के नेता ही नहीं बच्चा-बच्चा समझता है। आलाकमान से अच्छे संबंध होने के बाद भी सीएम का पद न मिलने का मलाल आपको रहा है। शिवराज सिंह चौहान के समय भी आपका दर्द उजागर होता रहता था, वर्तमान सीएम के साथ मर्ज ज्यादा ही बढ़ गया।
आप भी कई बड़े नेताओं के साथ दिल्ली से मध्यप्रदेश बड़ी उम्मीद से आए थे। पश्चिम बंगाल चुनाव में आपके द्वारा की गई कथित मेहनत के दम पर भले ही भाजपा उस समय सत्ता में नहीं आई, लेकिन आपको उम्मीद थी कि केंद्रीय नेतृत्व इस बार तो सीएम की कुर्सी तक पहुंचा ही देगा।
इससे आप इतने हताश और निराश हो गए कि मोहन यादव के सीएम बनने के बाद ही अपने बगावती सुर तेज कर दिए। कई मौकों पर आप आमने-सामने भी हुए। पहले लगा कि सबकुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन आपकी फितरत जारी रही।
पता है मंत्रीजी, इससे इंदौर का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। उस इंदौर को आपसे बहुत उम्मीद थी, जिसने आपको कई विधानसभा क्षेत्रों से विधायक बनवाया है। लेकिन, आपने इंदौर पर ध्यान दिया ही नहीं। अपनी वरिष्ठता साबित करने में लगे रहे और पूरे इंदौर की राजनीति की बाट लगा दी।
आज इंदौर के 9 विधायकों में से कितने आपके साथ हैं? संगठन में जोर-तोर कर अपने समर्थक रखवाने के बाद भी जब आप गिनती करेंगे तो काफी कम नेता ही आपके साथ खड़े नजर आएंगे।
सच कहूं मंत्रीजी, आपकी फितरत ने ही आपका और हमारे इंदौर का नुकसान किया है।
मान लिया कि भले आपने चिट्ठी न लिखी हो, लेकिन जरा दिल पर हाथ रख कर कहिएगा-आपके दिल की बात ही है ना…



