इंफाल। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन शायद जल्द ही समाप्त हो जाए। भाजपा ने राज्य में सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। बुधवार को 10 विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर 44 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।
उल्लेखनीय है कि 13 फरवरी को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। राज्य में राष्ट्रपति लागू हुए 103 दिन हो चुके हैं। इसके बाद अब भाजपा ने फिर से नई सरकार बनाने का दावा पेश किया है। मणिपुर में यह हलचल ऐसे वक्त पर सामने आई है जब 29 मई को पीएम मोदी सिक्किम के भारत में शामिल होने पर आयोजित जुबली समारोह में भाग लेने के लिए जाने वाले हैं। राज्यपाल से मुलाकात के बाद भाजपा विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह ने दावा किया कि मणिपुर के 44 विधायक जनता की भावनाओं का हवाला देते हुए नई सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। यह कदम जातीय तनाव और राष्ट्रपति शासन के बीच उठाया गया है, जिसे पिछले मुख्यमंत्री द्वारा मीतेई-कुकी संघर्ष से निपटने को लेकर आलोचना के कारण पद छोड़ने के बाद लागू किया गया था, जिसके कारण काफी अशांति और विस्थापन हुआ है। बुधवार को सिंह के साथ नौ अन्य विधायकों ने कहा कि समूह ने राज्यपाल से मुलाकात की। बीजेपी विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह ने कहा कि हमने राज्यपाल से कहा कि 44 विधायक तैयार हैं। हमने दावा पेश किया है अब आगे केंद्रीय भाजपा नेतृत्व अंतिम फैसला लेगा।
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भाजपा कैसे जुटाएगी समर्थन
मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में 32 मैतेई विधायक, तीन मणिपुरी मुस्लिम विधायक और नौ नागा विधायक शामिल हैं। ऐसे में यह कुल संख्या 44 पहुंचती है। कांग्रेस के पास पांच मैतेई सीटें हैं। शेष 10 विधायक कुकी हैं, जिनमें सात भाजपा के बागी, दो कुकी पीपुल्स अलायंस के और एक निर्दलीय शामिल हैं। इससे पहले 21 विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूर्वोत्तर राज्य में शांति और सामान्य स्थिति सुनिश्चित करने के लिए लोकप्रिय सरकार बनाने का आग्रह किया गया था। पत्र पर भाजपा के 13, एनपीपी-नगा पीपुल्स फ्रंट के तीन-तीन और विधानसभा के दो स्वतंत्र सदस्यों के हस्ताक्षर थे।


