भाजपा ने पार्षद जीतू यादव को छह साल के लिए पार्टी से किया बाहर, नहीं चला इस्तीफे का दांव, संगठन की हो रही थी किरकिरी

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इंदौर। पार्षद कमलेश कालरा के घर मारपीट के मामले में महापौर परिषद के सदस्य जीतू यादव को को भाजपा ने छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। आज सुबह ही जीतू यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए भाजपा की प्राथमिकता सदस्यता तथा महापौर परिषद से इस्तीफा दिया था। इसके कुछ ही देर बाद भाजपा के प्रदेश महामंत्री और कार्यालय प्रभारी भगवानदास सबनानी ने निष्कासन का पत्र नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे को भेज दिया।

सबनानी ने पत्र में लिखा है कि वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद जितेंद्र कुमार (जीतू यादव) द्वारा पार्टी के ही पार्षद से विवाद तथा उसके बाद घटित अशोभनीय कृत्य से पार्टी की छवि धूमिल हुई है, जो कि अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। अत: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा वार्ड 24 के पार्षद जितेंद्र कुमार (जीतू यादव) को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित किया जा रहा है।

आज सुबह ही दिया था इस्तीफा

आज सुबह ही जीतू यादव ने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को भेजे अपने इस्तीफे में कहा है किमैं भाजपा का समर्पित और अनुशासित सिपाही हूं। मेरा, मेरे परिवार और अनुसूचित जाति के मेरे जाटव समाज का पार्टी से अटूट रिश्ता है। कुछ दिनों पहले इंदौर में पार्टी के एक साथी पार्षद के परिजनों के साथ हुई दुखद घटना में मेरा नाम घसीटकर पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। मैने इस मामले में अपना पक्ष सभी तथ्यों के साथ माननीय शहर अध्यक्ष के समक्ष रखकर खुद आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की थी। जीतू ने लिखा है कि मैं ये नहीं चाहता कि मेरे कारण पार्टी को किसी असहज स्थिति का सामना करना पड़े। अतः इस पूरे प्रकरण में निर्दोष साबित होने तक मै पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और एमआईसी से त्याग पत्र देता हूं। मुझे विश्वास है पार्टी मेरे साथ अन्याय नहीं होने देगी।

काफी किरकिरी के बाद पार्टी ने लिया फैसला

इस मामले में पूरे देश में भाजपा की किरकिरी हो रही थी। जीतू यादव विधानसभा 2 के नेताओं के खासमखास हैं, इस कारण पुलिस भी चुप बैठी थी। यहां तक कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश महामंत्री हितानंद शर्मा तक मामला पहुंचने के बाद भी कोई एक्शन नहीं हुआ था। जबकि इस मामले में कई वीडियो और ऑडियो वायरल हो रहे थे, जिससे साफ पता चल रहा था कि जीतू यादव की गलती है। इसके बाद भी कोई फैसला नहीं लिए जाने से पार्टी पर सवालिया निशान उठाए जा रहे थे। बाद में यह मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा और गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया।

अपनी चाल में सफल नहीं हुए आका

जीतू यादव अभी तक अपने आकाओं के दम पर उछल रहे थे। पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन दे रहे थे और साथ में सत्ता और संगठन को चुनौती भी दे रहे थे। जब दिल्ली से निर्देश आने लगे तो सारे आकाओं ने हाथ खींच लिए। वैसे भी दो नंबर की परंपरा रही है कि पहले खुली छूट दो और जब मामला फंसने लगे तो हाथ खींच लो। जीतू के साथ भी यही हुआ। सूत्र बताते हैं कि आकाओं ने ही कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता। इस्तीफा दे दो तो बाद में सब मामला संभाल लेंगे, लेकिन बात बिगड़ गई और पार्टी ने निष्कासित ही कर दिया।

अब देखते हैं पुलिस कब करती है गिरफ्तार

इस मामले में सबकुछ शीशे की तरह साफ होने के बावजूद पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। माना कि भाजपा के मंत्री और वरिष्ठ नेताओं का पुलिस पर दबाव रहा होगा, लेकिन अब जबकि पार्टी ने ही जीतू यादव के सिर से हाथ खींच लिए हैं तो अब देरी किस बात की। अब देखना यह होगा कि पुलिस आखिर जीतू यादव को कब गिरफ्तार करती है। यह भी हो सकता है कि जीतू के आका किसी नए दांव की तैयारी में हों।

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