मध्य प्रदेश में भारी बारिश की संभावना, मौमस विभाग ने रेड, ऑरेंज और यलो अलर्ट किया जारी

Date:

भोपाल। मौसम विभाग ने शनिवार को मध्य प्रदेश के 47 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने रेड अलर्ट समेत ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। आज सभी जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। भोपाल, सीहोर और हरदा जिले में लगातार तेज बरसात के कारण 3 अगस्त को स्कूल और आंगनबाड़ियों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। रायसेन, सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, छिंदवाड़ा और मंडला जिले में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

इन 18 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

प्रदेश के 18 जिलों में आज अतिभारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इनमें से विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, देवास, सीधी, रीवा, मऊगंज, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, दमोह और पांढुर्णा शामिल हैं।

इंदौर सहित 22 जिलों में यलो अलर्ट

इसके अलावा राज्य के 22 जिलों में यलो अलर्ट भी जारी किया गया है। मौसम विभाग ने शनिवार को भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, सतना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर में यलो अलर्ट जारी किया है।

तीन जिलों में स्कूल-आंगनबाड़ी बंद

मध्य प्रदेश में लगातार जारी बारिश के कारण भोपाल, हरदा और सीहोर में शनिवार को स्कूल-आंगनबाड़ी में छुट्टी घोषित की गई है। इस संबंध में जिला कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को बंद रखने की बात कही है।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

- डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार हिन्दी फिल्म वाले दशकों बाद भी  भूतों का स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग  ऊंचा नहीं उठा पाए हैं।  बेचार भूतों  को अब भी वही पुरानी  हवेली  में गुजारा करना पड़  रहा है।  वह भी ऐसी जगह पर, जहां कनेक्टिविटी बहुत ही कमजोर होती है , सड़क है ही नहीं या  अच्छी नहीं है। हवेली या बंगले के  पीछे जंगल है। बिजली नहीं।  टेलीफोन लाइन नहीं है, मोबाइल  नेटवर्क मिलता नहीं है! बड़ी खस्ताहाल जिंदगी होती होगी बेचारों की!  कुछ तो रहम करो बेचारों पर ! क्यों कोई भूत किसी 'एंटीलिया', किसी 'अडोब', किसी 'मन्नत', किसी 'जलसा', किसी 'गुलिता', किसी 'बख्तावर' में कब्ज़ा ज़माने नहीं जाता? प्रियदर्शन की अक्षय कुमार वाली फिल्म भूत बंगला में  नवीनता नाम की चीज है ही नहीं। इसका नाम भूत बंगला न होकर हेरा फेरी, भूल भुलैया, भागमभाग, हाउसफुल आदि कुछ भी हो सकता था। इसमें कुछ भी नया नहीं है। वही निर्देशक, वे ही मुख्य कलाकार, वैसी ही कहानी, वही बेमेल संगीत, वैसे ही बेतुके गाने,  व्हाट्सप्प पर घिस चुके वही जूने -पुराने जोक्स, भूतों की कहानी के वही पुराने टेम्पलेट्स, पंडितों की गढ़ी गई वही कहानी, वही कन्या की शादी का चैलेंज, वही वीएफएक्स से बनाये भूत और चमगादड़ें, अँधेरे से डरता भूत, बीसियों मीडिया पार्टनर्स के जरिये वही स्टार रेटिंग और वही ठगाते दर्शक ! अक्षय कुमार,परेश रावल,राजपाल यादव और असरानी ने इस फिल्म में एक भी ऐसा सीन नहीं किया कि याद रखा जाये। ऊपर से सह निर्माता अक्षय कुमार हैं, जिन्हें पूरे समय स्क्रीन पर बने ही रहना है। अकेले उनका मोनोलॉग संभव नहीं था, इसलिए फिलर के रूप में जिशु सेनगुप्ता,तब्बू,वामिका गब्बी,मनोज जोशी,मिथिला पालकर,राजेश शर्मा, भावना पाणी, ज़ाकिर  आदि को रोल दिए गए होंगे।  ये लोग भी अक्षय के साथ हो परदे पर होते हैं। असुर की तपस्या से लेकर देवता-राक्षसों का युद्ध, गंगा की पवित्रता, शिव जाप का माहात्म्य, भाई बहन का प्यार, प्रेत बाधा और उसका उपचार, परेश रावल और राजपाल यादव की फूहड़ कॉमेडी, सोशल मीडिया में रील्स जैसे दोहरे अर्थवाले एक्शन शुरू में थोड़ा दिलचस्प लगते हैं, लेकिन जब उनका दोहराव होता है और अंत में 'भूत -वीर' हीरो प्रकट होता है, तब कहानी की कलई खुल जाती है। 'भूल भुलैया' टाइप कहानी 'स्त्री' बनते- बनते रह जाती है। कॉमेडी, हॉरर और थ्रिलर  का मेल कराने की कोशिश में फिल्म हींग के तड़केवाली खीर बनकर रह गई है। भूत बंगला में किसी भी दृश्य का प्रभाव टिक ही नहीं पाता क्योंकि फिल्म बार बार ट्रेक बदल देती है और फिर वापस उसी घिसे पिटे ट्रेक पर आ जाती है। फिल्म में बार बार परेश रावल के पिछवाड़ा सुलगने पर आप कितनी बार हंस सकते हैं? हंस भी सकते हैं या नहीं? किसी असुंदर व्यक्ति का नाम सुन्दर हो तो यह हर किसी के लिए हास्य नहीं हो सकता। फिल्म बार बार दर्शकों से कहती है - हंसो, जबकि दर्शक को उस सीन पर नहीं, तीन तीन लेखकों और तीन तीन निर्माताओं पर हंसी आती है। इसे देखना टाला जा सकता है। टालनीय फिल्म ! डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार