देशभर में NEET UG 2026 Re-Exam को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार के एक बड़े फैसले ने राजनीतिक और तकनीकी दोनों हलकों में बहस छेड़ दी है। पेपर लीक रोकने के उद्देश्य से सोशल मीडिया मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार शुरू कर दी है।

इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यदि सरकार वास्तव में पेपर लीक रोकना चाहती, तो केवल Telegram बंद करने जैसे कदम नहीं उठाती।
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केजरीवाल ने कहा, “सेना के जहाजों से पेपर ट्रांसपोर्ट करना या Telegram बंद करना समाधान नहीं है। पेपर लीक करोड़ों-अरबों रुपये का संगठित कारोबार बन चुका है और इसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की जरूरत है।”

Telegram का भी आया जवाब
इस विवाद के बीच Telegram Messenger की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। प्लेटफॉर्म ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी शॉपिंग मॉल में चोरी हो जाए तो क्या सभी मॉल बंद कर दिए जाएंगे? या किसी सड़क पर तेज रफ्तार वाहन चलने पर सभी सड़कें बंद कर दी जाएंगी?
Telegram की इस प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर नई बहस को जन्म दे दिया है। कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण के मुद्दे से जोड़कर देख रहे हैं।
क्यों लगाया गया Telegram Ban?
मंगलवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जानकारी दी कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 21 जून को होने वाली NEET UG 2026 पुनर्परीक्षा से पहले Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
NTA ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और किसी भी संभावित पेपर लीक को रोकने में मदद मिलेगी।
सरकारी जानकारी के अनुसार, IT Act 2000 की धारा 69A के तहत Telegram पर यह कार्रवाई की गई है। इसके अलावा Telegram को यह भी निर्देश दिया गया है कि भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा 30 जून 2026 तक बंद रखी जाए।
पेपर लीक पर सियासत तेज
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में Telegram Ban को लेकर देशभर में दो तरह की राय सामने आ रही है।
एक पक्ष का मानना है कि परीक्षा से पहले ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष इसे मूल समस्या से ध्यान हटाने वाला कदम बता रहा है।
क्या Telegram Ban से सचमुच रुकेगा Paper Leak?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर लगाम लग सकेगी, या फिर इसके लिए पूरे सिस्टम में बड़े सुधारों की जरूरत है?
क्या सरकार का यह फैसला छात्रों के हित में है, या फिर यह केवल एक अस्थायी उपाय है? क्या Telegram Ban से NEET 2026 Re-Exam पूरी तरह सुरक्षित हो पाएगा?
आपकी क्या राय है? क्या पेपर लीक रोकने के लिए Telegram Ban सही कदम है, या सरकार को कोई और मजबूत रणनीति अपनानी चाहिए? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताइए।



