महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी भूचाल तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) को एक और बड़ा झटका देते हुए पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इसी बीच आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने पोस्ट में आदित्य ठाकरे ने बिना नाम लिए बागी सांसदों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी छोड़ने वालों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी और साख बिकाऊ है। आदित्य ने आरोप लगाया कि ये नेता जनता के भरोसे और अपने सिद्धांतों को छोड़कर सत्ता के लालच में बिक गए हैं।
👉 यह भी पढ़ें:
- Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी, पाक मंत्री की ‘हाथ काट देंगे’ वाली धमकी चर्चा में
- Iran-US Tension: ओमान के नए Oil Tanker Route से मचा बवाल, मिसाइल हमले से बढ़ा तनाव; ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी
- Maharashtra : MVA की बैठक में नहीं पहुंचे 23 विधायक, उद्धव ठाकरे बोले-क्या सचमुच हम साथ हैं
- PoK Protest News: क्या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उठ रही है बगावत की सबसे बड़ी लहर? हजारों लोगों का आंदोलन, ‘Pakistan Army Go Back’ के नारों से गूंजा इलाका
- Iran vs Israel Crisis: क्या सचमुच बंद हो गया Hormuz Strait? ईरान की चेतावनी से मचा वैश्विक हड़कंप, तेल बाजार में बढ़ा तनाव
- Maharashtra Politics: ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ से लेकर ‘बिके हुए नेता’ तक, संजय राउत के हमले से गरमाई शिवसेना की सियासत
उन्होंने याद दिलाया कि ये सभी सांसद महाविकास अघाड़ी (MVA) और INDIA गठबंधन के समर्थन से NDA के खिलाफ चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। चुनाव के दौरान इन्हीं नेताओं ने शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के वरिष्ठ नेताओं से अपने क्षेत्रों में प्रचार करने की गुहार लगाई थी।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि जनता ने इन सांसदों को INDIA गठबंधन की विचारधारा और NDA के विरोध के आधार पर वोट दिया था। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद अचानक पाला बदलना मतदाताओं के विश्वास के साथ धोखा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “गंदी राजनीति का सबसे घटिया उदाहरण” बताते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र की जनता इस तरह की राजनीतिक अवसरवादिता को कभी माफ नहीं करेगी।
दूसरी ओर, बागी सांसदों का तर्क है कि वे पार्टी की बदलती दिशा और शिवसेना (UBT) के कांग्रेस के साथ बढ़ते रिश्तों से असहज थे। उनका कहना है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से दूर जा रही है, इसलिए उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की अहम बैठक बुलाई गई थी, लेकिन 6 सांसद उसमें शामिल नहीं हुए। बैठक में केवल तीन सांसदों ने ही पहुंचकर उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई, जिसके बाद बगावत की अटकलें और तेज हो गईं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ‘ऑपरेशन टाइगर’ महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) के लिए बड़ा संकट साबित होगा, या उद्धव ठाकरे इस चुनौती को अवसर में बदल पाएंगे?
आपकी राय में सांसदों का पाला बदलना राजनीतिक मजबूरी है या मतदाताओं के विश्वास के साथ विश्वासघात? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।



