नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ‘ और कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्धाटन किया। सेवा तीर्थ में पीएमओ, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट और कैबिनेट सेक्रेटेरिएट हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक अहम निर्णय हुए, नीतियां बनीं, लेकिन ये भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थीं। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।
पीएम मोदी ने कहा कि आज हम सब एक नया इतिहास बनते हुए देख रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन भारत की विकास यात्रा में एक नई शुरुआत का गवाह बन रहा है। आज हम सब ‘विकसित भारत‘ के संकल्प के साथ सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था, जब कलकत्ता शहर देश की राजधानी हुआ करता था, लेकिन 1905 के बंगाल विभाजन के उस दौर में कलकत्ता ब्रिटिश विरोधी आंदोलन का प्रबल केंद्र बन चुका था। इसलिए अंग्रेजों ने 1911 में भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट किया और उसी के बाद अंग्रेजी हुकूमत की जरूरतों और उसकी सोच को ध्यान में रखकर नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी इमारतें बनाने का काम शुरु हुआ। पीएम ने कहा कि रायसीना हिल्स के इन भवनों के उद्घाटन के वक्त उस समय के वायसराय ने कहा था कि ये भवन ब्रिटिश सम्राट की इच्छाओं के अनुरूप बने हैं यानी ये भवन ब्रिटेन के महाराजा की सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम थे। रायसीना हिल्स का चुनाव भी इसलिए किया गया ताकि ये इमारतें दूसरी इमारतों से ऊपर रहें, कोई उनकी बराबरी न कर सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ का ये परिसर किसी पहाड़ी पर न होकर जमीन से ज्यादा जुड़ा है। मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वो किसी महाराजा की सोच को नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे।
नए भवन में पहले दिन कई अहम फैसले
नए कार्यालय से काम शुरू करते ही प्रधानमंत्री ने कई अहम फैसलों पर हस्ताक्षर किए। इनमें ‘पीएम राहत योजना’ की शुरुआत शामिल है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि समय पर उपचार के अभाव में किसी की जान न जाए। सरकार पहले ही तीन करोड़ ‘लखपति दीदी’ का लक्ष्य हासिल कर चुकी है, जो निर्धारित समयसीमा से एक वर्ष पहले पूरा हुआ। अब प्रधानमंत्री ने मार्च 2029 तक इस संख्या को बढ़ाकर छह करोड़ करने का नया लक्ष्य तय किया है। यह कदम महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


