कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच एक और बूथ–लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत के बाद सीएम ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा कि कृष्णानगर में एक और बीएलओ, एक महिला शिक्षक की मौत की खबर सुनकर बहुत सदमा लगा।
ममता ने लिखा कि विधानसभा क्षेत्र छपरा (82) में बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपने घर पर आत्महत्या करने से पहले अपने सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है। ममता ने पूछा कि एसआईआर की वजह से पश्चिम बंगाल में और कितनी जानें जाएंगी। एसआईआर के लिए और कितने लोगों को मरना होगा? इस प्रोसेस के लिए हमें और कितनी लाशें देखनी पड़ेंगी? यह अब सच में बहुत चिंता की बात हो गई है।
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बताया जाता है कि नादिया जिले की बूथ–लेवल ऑफिसर (बीएलओ) रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर राज्य में एसआईआर से जुड़े काम के दबाव के कारण आत्महत्या की। अपने सुसाइड नोट में रिंकू तरफदार ने चिंता जताई थी कि अगर उन्होंने बीएलओ का काम पूरा नहीं किया तो उन पर प्रशासनिक दबाव आएगा। पुलिस के मुताबिक, महिला बीएलओ ने सुसाइड नोट में कथित तौर पर लिखा था कि मैं प्रेशर नहीं झेल सकती। इस हफ्ते पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी आत्महत्या की यह दूसरी घटना है। इससे पहले जलपाईगुड़ी में शांति मुनि एक्का नाम की एक और महिला बीएलओ ने आत्महत्या की थी। एक्का की मौत के बाद भी मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की आलोचना की थी।
वरिष्ठ टीएमसी नेताओं अरूप बिस्वास, चंद्रिमा भट्टाचार्य और पार्थ भौमिक ने शनिवार को चुनाव आयोग के कार्यालय में इन घटनाओं के बारे में चिंता जताते हुए ज्ञापन सौंपा। अरूप बिस्वास ने कहा कि जिस काम को करने में दो साल लगते हैं, उसे दो महीने में निपटाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि हर बूथ पर 150 से 200 मतदाताओं के नाम जानबूझकर गायब किए जा रहे हैं और आयोग की वेबसाइट गलतियों से भरी है। उन्होंने कहा कि इन खामियों की वजह से ही लोगों की जान जा रही है। टीएमसी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बीएलओ को एसआईआर के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। भट्टाचार्य ने कहा कि बीएलओ को बिना उचित प्रशिक्षण के अनुचित दबाव में रखा जा रहा है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ रही है।


