इंदौर। लोकायुक्त की इंदौर इकाई ने शनिवार को एमआईजी थाने के प्रधान आरक्षक अरुण शर्मा और नगर सुरक्षा समिति के पूर्व सदस्य अय्यूब खान को 50 हजार की रिश्वत लेते पकड़ा। अब उसे निलंबित कर दिया गया है। यह कोई नया मामला नहीं है। नगर सुरक्षा समिति के माध्यम से लंबे समय से रिश्वत का खेल चल रहा है और एमआईजी थाना तो इसमें काफी आगे है।
उल्लेखनीय है कि पहले महिला परामर्श समिति के माध्यम से शहर के थानों में जमकर रिश्वतखोरी के मामले सामने आते थे। इसमें भी थानों में महिलाओं को परामर्श देने के नाम पर बैठी महिलाएं बिचौलिए का काम करने लगी थीं। नगर सुरक्षा समिति तो पहले से ही बदनाम है। कई बार इसको लेकर सवाल भी खड़े हुए हैं, लेकिन न तो वरिष्ठ अधिकारी ध्यान देते हैं और न ही शासन स्तर पर इस पर कभी गंभीरता दिखाई गई। नगर सुरक्षा समिति में किन लोगों की भर्ती होती है, इसका ध्यान भी नहीं रखा जाता। समिति के सदस्यों को एकतरह से दादागिरी और दलाली का लाइसेंस मिल जाता है।
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वरिष्ठ अधिकारी कभी ध्यान नहीं देते
वरिष्ठ अधिकारियों के पास शिकायत पहुंचने के बाद भी वे कभी इस पर ध्यान नहीं देते। कभी इसकी समीक्षा भी नहीं की जाती कि नगर सुरक्षा समिति के कार्यों से पुलिस को कितना फायदा हो रहा है। ऐसा नहीं है कि नगर सुरक्षा समिति में सारे सदस्य ही भ्रष्ट हैं या बिचौलिए का काम कर रहे हैं, इसमें कई सदस्य जनता और पुलिस के बीच की कड़ी बन ईमानदारी से काम भी करते हैं लेकिन ऐसे सदस्यों की संख्या काफी कम है। हर थानों में इनकी शिकायतें हैं, लेकिन मामले पकड़े नहीं जाते।
टीआई से लेकर सिपाही तक इनके भरोसे
थाने में जैसे ही कोई मामला पहुंचता है, टीआई से लेकर सिपाही तक नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों के मार्फत संबंधित को संदेश भिजवाने लगते हैं। फिर सेटिंग की बात होने लगती है। ज्यादा धाराएं लगा देने से लेकर जेल भिजवाने तक की धमकी दी जाती है और फिर चलता है रिश्वत का खेल। यह तो गनीमत थी कि पीड़ित महिला लोकायुक्त के पास पहुंच गई और यह मामला सामने आ गया। अधिकांश मामलों में लोग डरकर शिकायत नहीं करते।
काफी पुराना खिलाड़ी है अरुण शर्मा
ऐसा नहीं है कि अरुण शर्मा ने पहली बार ऐसा किया है। जब वह क्राइम ब्रांच में था तब बी उसकी शिकायत हुई थी। एमआईजी थाना में पदस्थ होने के बाद उसकी आदतें और बढ़ गईं। वह अक्सर ड्रेस नहीं पहनता था। बताया जाता है कि पूर्व में यहां टीआई मनीष लोधा ने उसे वर्दी पहनने के लिए कई बार आगाह भी किया था, जब नहीं माना तो उसे पत्र लिखकर चेतावनी भी दी थी। अय्यूब खान को भी मनीष लोधा ने नगर सुरक्षा समिति से हटवा दिया था, इसके बावजूद वह थाने में आकर दलाली करता रहा।



