मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित 155 साल पुराने डेली कॉलेज की साख पर बट्टा लगा रहा डीसी बोर्ड, मनमाने तरीके से बढ़ाया कार्यकाल

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इंदौर। मध्यप्रदेश ही नहीं पूरे देश में प्रतिष्ठित डेली कॉलेज पिछले काफी दिनों से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर खूब खबरें चलती हैं। आरोप-प्रत्यारोप लगते हैं और कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है, जिससे इसकी साख पर बट्‌टा लग रहा है। पिछले दिनों डेली कॉलेज की हेड गर्ल निया बाहेती ने इस्तीफा देते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। प्रिंसिपल ने अपने जवाब में अपने आरोपों पर लीपापोती की थी।

उल्लेखनीय है कि डेली कॉलेज की स्थापना ब्रिटिश भारतीय सेना के सर हेनरी डेली ने भारत के औपनिवेशिक ब्रिटिश राज के दौरान की थी। इसकी कहानी 1870 से शुरू होती है जब इस संस्थान का नाम रेजीडेंसी स्कूल रखा गया था। 1876 में इसका नाम बदलकर पूर्वी राजकुमार कॉलेज कर दिया गया और 1882 में इसे डेली कॉलेज के नाम से जाना जाने लगा।

मनमाने फैसले ले रहा डीसी बोर्ड

डेली कॉलेज एमपी सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड संस्था है। इसका संचालन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के द्वारा किया जाता हैं जिसमें 9 सदस्य है। 5 सदस्य तीन श्रेणियों से चुने जाते है, दो सदस्यों को मध्यप्रदेश सरकार मनोनीत करती है और दो सदस्य पेरेंट नॉमिनी यानी बोर्ड द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। वर्तमान बोर्ड का गठन 13 दिसंबर 2020 को हुआ था।

बोर्ड मीटिंग कर बढ़ा लिया कार्यकाल

नियमानुसार बोर्ड का कार्यकाल पांच साल का रहता है, लेकिन वर्तमान बोर्ड अपना कब्जा नहीं छोड़ना चाहता। इसीलिए लगातार विवादों में रहने के बाद भी वर्तमान बोर्ड ने 29 सितंबर को मीटिंग बुलाकर अपना कार्यकाल चार महीने बढ़ा लिया। यहां सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या आफत आ पड़ी थी कि कार्यकाल बढ़ाने की नौबत आई। नियमानुसार कार्यकाल इमरजेंसी में ही बढ़ाने का प्रावधान है। अभी न कोई बीमारी फैली है और न ही देश में दंगे हो रहे हैं, फिर भी कार्यकाल बढ़ाना वर्तमान बोर्ड पर सवालिया निशान खड़े करता है।

लगातार विवादों में है डेली कॉलेज

पिछले कुछ समय से डेली कॉलेज लगातार विवादों है। बोर्ड मीटिंग में कुछ लोग मनमाने फैसले लेते हैं. महाराज नरेंद्र सिंह झाबुआ 2022 से मीटिंग में नहीं आ रहे। सुमित चंडोक को 2024 में ही बोर्ड से हटना था, लेकिन 2025 में वे हटे। ये उस कैटगेरी में आए थे जिनके बच्चे यहां पढ़ते हैं। जब उनका बच्चा यहां से पढ़कर चला गया फिर भी वे बोर्ड में बने रहे। न तो बोर्ड ने उन्हें हटाने की कोशिश की और न ही उन्होंने इस्तीफा दिया। उनकी जगह करण नरसरिया आए और वे भी उसी टीम के मनमाने फैसलों में हामी भरने लगे।

वर्तमान डीसी बोर्ड-

पुराने दानदाता श्रेणी से दो सदस्य निर्वाचित

1.महाराज नरेंद्र सिंह , झाबुआ

2,प्रियव्रत सिंह , खिलचीपुर

ओल्ड डेलियन एसोसिएशन से दो सदस्य

1.संदीप पारेख

2.धीरज लुल्ला

नए दानदाता श्रेणी से एक सदस्य

1.हरपाल भाटिया

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मनोनीत दो सदस्य

1.विक्रम सिंह पुआर, देवास

2.राज्यवर्धन सिंह, नरसिंहगढ़

वर्तमान छात्रों के अभिभावकों में से दो सदस्य

1.संजय पाहवा

2.करण नरसरिया

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