इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को इंदौर में आयोजित ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के तीन दिवसीय ग्रीन एक्स प्रदर्शनी के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर भाजपा के बांका यानी नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को सीएम के साथ आगे की पंक्ति में बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली। इसके कारण वे पूरे समय तिलमिलाते रहे।
आमतौर पर जब भी सीएम का कार्यक्रम होता है, सुमित मिश्रा सीएम के साथ वाली कुर्सी जुगाड़ करने में सफल रहते हैं। ऐसा नहीं भी हुआ तो आगे की पंक्ति तो उनके लिए तय है, लेकिन आज के कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ। आगे की पंक्ति में सिर्फ सात कुर्सियां थीं, जिन पर इंदौर के पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, मंत्री तुलसी सिलावट, सीएम डॉ.मोहन यादव, दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे तथा म.प्र. राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर विराजमान थे।
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मिश्रा ने की कुर्सी खिसकाने की कोशिश
जब सुमित मिश्रा को आगे जगह नहीं मिली तो वे जुगाड़ में लग गए। उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को थोड़ी जगह देने को कहा और कुर्सी खिसकाने लगे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने मना कर दिया। वे मोघेजी से भी जगह देने का निवेदन करते नजर आाए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके कारण कार्यक्रम में पूरे समय सुमित मिश्रा के चेहरे पर तनाव बना रहा।
रणदिवे और सोनकर को आगे देख और तिलमिलाए
सुमित मिश्रा शायद इस बात से भी खफा दिखे कि भाजपा नगर अध्यक्ष होने के बाद भी उनके लिए सीएम के साथ आगे की पंक्ति में बैठने का इंतजाम नहीं किया गया। इसके विपरित भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे को आगे बिठाया गया। इतना ही नहीं सावन सोनकर और कृष्णमुरारी मोघे को भी आगे जगह दी गई।
भाजपा में चर्चा-खेलोगे तो, खेला होगा ही
आज के घटनाक्रम को देखकर भाजपा में जबरदस्त चर्चा हो रही है। कार्यक्रम स्थल पर ही लोग कह रहे थे कि दूसरों के साथ खेलोगे तो आपके साथ भी खेला होगा ही। भाजपा के कुछ कार्यकर्ता तो यह भी कहते नजर आए कि मोघे, रणदिवे और सोनकर ने खेला कर बदला चुका दिया है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि यह सब मिश्राजी के कर्मों का ही फल है। वे दूसरों के साथ खेला करते रहते हैं, इसलिए उनके साथ भी ऐसा ही हो रहा है।
अब धीरे-धीरे उठने लगा है पर्दा
मिश्राजी जब से नगर अध्यक्ष बने हैं, तब से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक के साथ खेलते रहे हैं। हर किसी से वादा कर बाद में उससे मुकर जाना मिश्राजी की आदतों में शुमार है। इसके साथ ही वे अपनी जुबान पर भी कंट्रोल नहीं रख पाते। भाजपा के कार्यकर्ता ही कह रहे हैं कि मिश्राजी के व्यवहार के कारण उनके नकली छवि से अब धीरे-धीरे पर्दा उठने लगा है।



