भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पीएम नरेंद्र मोदी के चिट्ठी लिखकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा दी है। अपने पत्र में पटवारी ने राज्य सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को पद से हटाने की मांग की है। पटवारी ने इसमें मुख्य सचिव के एक बयान को आधार बनाया है।
कांग्रेस का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव ने यह कहा कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता। पटवारी ने इसे महज टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में लेन–देन आधारित शासन व्यवस्था का सीधा संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर यह बयान तोड़–मरोड़ कर पेश किया गया है, तब भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तत्काल स्थिति स्पष्ट करे, क्योंकि इससे शासन की साख पर गहरा असर पड़ा है।
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कांग्रेस ने पत्र में कहा कि पार्टी लंबे समय से मध्यप्रदेश में 50% कमीशन की बात उठा रही है, जिसे भाजपा सरकार राजनीतिक आरोप बताकर खारिज करती रही। लेकिन अब मुख्य सचिव के कथित बयान से यह आशंका और मजबूत हो गई है कि भ्रष्टाचार कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित और संरचित तंत्र के रूप में काम कर रहा है।
किसके संरक्षण में चल रही व्यवस्था
पटवारी ने सवाल उठाया है कि अगर जिला स्तर पर कलेक्टर पैसे लेकर काम कर रहे हैं, तो यह पैसा केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकता। कांग्रेस ने आशंका जताई कि यह राशि प्रशासनिक नेटवर्क, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता–समर्थित बिचौलियों तक पहुंच रही होगी। पार्टी ने पूछा है कि सरकार बताए यह व्यवस्था किसके संरक्षण में चल रही है, किन जिलों में ज्यादा है और अब तक कितने अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई हुई है।
बेलगाम हो चुकी है नौकरशाही
पटवारी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि नौकरशाही बेलगाम हो चुकी है, शिकायत निवारण तंत्र विफल है और जिला प्रशासन पर “वसूली तंत्र” बनने के आरोप लग रहे हैं। पार्टी ने इसे सुशासन नहीं, बल्कि राज्य सत्ता की नैतिक विफलता करार दिया। पत्र के अंत में जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री के नारे ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मध्यप्रदेश में बिना पैसे काम नहीं होने की स्थिति है, तो यह न केवल जनता के अधिकारों का हनन है, बल्कि केंद्र सरकार के घोषित सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
प्रदेश की छवि हो रही है खराब
पटवारी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं से प्रदेश की छवि खराब हो रही है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। सीएम मोहन को गंभीर प्रशासनिक विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि ऐसा लगता है कि उनका नेतृत्व राज्य सिस्टम पर से कंट्रोल खो रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल राज्य में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताएं और सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है और मांग की कि पूरे राज्य में जिला प्रशासन स्तर पर भ्रष्टाचार की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, चाहे वह कोई केंद्रीय एजेंसी या कोई स्वतंत्र समिति करे।



