कैबिनेट की बैठक में सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को मंजूरी, कई अन्य फैसले भी हुए

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भोपाल। मध्यप्रदेश में अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के नाम से बस सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर परिवहन विभाग ने इसकी सम्पूर्ण योजना तैयार की थी। सके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में, खासकर सभी जनजातीय सुगम यात्री परिवहन के बेहतर प्रयास किए जाएंगे। आज मंगलवार को भोपाल में हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी हुए।

उल्लेखनीय है कि सुगम परिवनह सेवा सीएम यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके तहत प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्यस्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी। प्रदेश के सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में 7 क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठित भी की जायेंगी। यह सभी बॉडी यात्री परिवहन को बेहतर बनाने, यात्री किराया तय करने, रूट चार्ट तैयार करने में समन्वय और यात्रियों को योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मार्गदर्शन करेगी।

सभी इलाकों में बसें चलाने की योजना

2003 में राज्य सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद शुरू की जा रही इस नई सेवा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर प्रदेश के सभी आदिवासी इलाकों में, सुगम यात्री परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार हर आवश्यक प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री ने यात्री परिवहन की भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना के सभी पक्षों का गंभीरता से अध्ययन करने को कहा है। नई परिवहन योजना में प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रिस्तरीय मॉनिटरिंग की जाएगी। सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समितियाँ गठित की जाएंगी, जो यात्री परिवहन को बेहतर बनाने, किराया तय करने, रूट चार्ट तैयार करने और योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए समन्वय और मार्गदर्शन करेंगी। आय के स्रोत निर्माण के लिए सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

प्राथमिकता से परमिट देगी सरकार

सरकार अनुबंधित बसों को प्राथमिकता से परमिट देगी, जबकि बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का ही रहेगा। यात्रियों और बस ऑपरेटर्स के लिए एक ऐप और कंपनी की मॉनिटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी बनाया जाएगा। प्रदेश के सात बड़े संभागों में यात्री बसों की आवश्यकता और उनकी संख्या का निर्धारण करने के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है। बस ऑपरेटर्स को भी निरंतर व्यवसाय और अनुकूल परिवेश देने का प्रावधान किया गया है, जिससे उनकी सेवाएं बाधित हों और यात्रियों को भी कोई असुविधा हो।

इन प्रस्तावों पर लगी मुहर

-सीएम राइज स्कूल का नया नामअब इसे संदीपनि स्कूल के नाम से जाना जाएगा। स्कूल की डिजाइन में भगवान श्रीकृष्ण की छवि शामिल की जाएगी।

-85 लाख छात्रों को अप्रैल माह में निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित की जाएंगी।ृ

-कामकाजी महिलाओं के हॉस्टल के लिए केंद्र सरकार से 224 करोड़ रुपये मिले हैं। औद्योगि क्षेत्रों में महिला हॉस्टल बनाए जाएंगे।

-5,000 महिलाओं के लिए हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

-गेहूं खरीदी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,600 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया।

-14.76 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें से 8 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी पहले ही हो चुकी है।

-मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत अब सरकार बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि पीपीपी मॉडल के तहत प्राइवेट ऑपरेटर्स से बसें चलाई जाएंगी।

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