नई दिल्ली। भारतीय नौसेने की ताकत अब और बढ़ गई है। शुक्रवार को नौसेना के बेड़े में आईएनएस तारागिरी शामिल हो गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में स्वदेशी अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी और आईएनएस अरिदमन को नौसेना में शामिल कराया। इस समारोह में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी समेत अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हुए।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि आईएनएस तारागिरी के जलावतरण से भारत की नौसेना की ताकत और बढ़ी है। आईएनएस तारागिरी में ब्रह्मोस और सुपरसोनिक मिसाइल से लैस है। इतिहास हमें बताता है कि कोई भी देश बिना अपनी नौसैनिक ताकत को मजबूत किए शक्तिशाली नहीं माना जा सकता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि ये शहर अपने आप में भारत की समुद्री शक्ति का साक्षी रहा है, इसलिए विशाखापट्टनम से आईएनएस तारागिरी कमीशनिंग अपने आप में एक बहुत ही महत्वपूर्ण पल है। हमारी सांस्कृतिक विरासत से लेकर आज की रणनीतिक वास्तविकताओं ने समुद्र में हमेशा भारत की दिशा तय की है। भारत का हमेशा से ही समुद्र के साथ अनोखा संबंध रहा है और समय के साथ समुद्र से हमारा रिश्ता और भी मजबूत होता गया है।
👉 यह भी पढ़ें:
- US Tariff Shock: क्या भारत पर फिर गिरेगा Trump Tariff Bomb? अमेरिका के नए प्रस्ताव से बढ़ी व्यापार युद्ध की आशंका
- सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज, सीजेआई सूर्यकांत ने दिलाई शपथ, जानें अब कितनी हुई जजों की संख्या
- Earthquake Alert: भारत के पूर्वी तट के पास भूकंप, बंगाल की खाड़ी में धरती डोली
- भारत है ताकतवर सैन्य शक्ति’ — अमेरिकी रक्षा मंत्री ने की तारीफ, रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने का ऐलान
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमें केवल अपने तटों की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, चोक पॉइंट्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए। मुझे खुशी है कि भारतीय नौसेना इन सभी सुरक्षा कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हुई है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है, भारतीय नौसेना ने हमारे वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। हमारी नौसेना ने यह साबित कर दिया है कि वह न केवल भारत के हितों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए विश्व स्तर पर हर संभव कदम उठा सकती है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बनाती है।


