भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए ओडिशा तट से परमाणु क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का पहला परीक्षण किया है। इस परीक्षण के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल होता दिखाई दे रहा है जिनके पास बेहद लंबी दूरी तक मार करने वाली रणनीतिक मिसाइल तकनीक मौजूद है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने शुक्रवार शाम इस मिसाइल का परीक्षण किया। हालांकि संगठन ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह परीक्षण भारत की अत्याधुनिक लंबी दूरी की मिसाइल परियोजना से जुड़ा हुआ है।
👉 यह भी पढ़ें:
इस घटनाक्रम के बाद अग्नि-6 को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में रक्षा अनुसंधान प्रमुख समीर वी कामत ने कहा था कि सरकार की अनुमति मिलते ही अग्नि-6 परियोजना आगे बढ़ाने के लिए सभी तकनीकी तैयारियां पूरी हैं।
बताया जा रहा है कि यह मिसाइल 10 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम हो सकती है। यदि भारत पूरी तरह अंतरमहाद्वीपीय क्षमता हासिल कर लेता है तो दुनिया के कई बड़े देशों तक उसकी रणनीतिक पहुंच संभव हो जाएगी।
इस समय केवल अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास पूर्ण अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक मौजूद है। वहीं फ्रांस और ब्रिटेन के पास परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
इसके साथ ही भारत ने स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली तकनीक में भी बड़ी सफलता हासिल की है। यह तकनीक साधारण वारहेड को सटीक निशाना साधने वाले निर्देशित हथियार में बदल सकती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ओडिशा तट से इस नई प्रणाली का भी सफल उड़ान परीक्षण किया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल सैन्य ताकत नहीं बल्कि उन्नत रॉकेट प्रणोदन, मार्गदर्शन और पुनः प्रवेश तकनीक में भारत की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण है।


