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मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर ने हमेशा ही भाजपा का साथ दिया है और इस बार तो पूरी झोली ही भर दी। इंदौर की नौ में से नौ सीटों पर भाजपा के विधायक हैं, लेकिन हैं कहां?
बेचारे, महेंद्र हार्डिया लाख विरोध के बावजूद टिकट ले आए और अच्छे वोटों से जीत भी गए, लेकिन मैदान से गायब। एक हैं मनोज पटेल। जब एक ‘बड़े‘ नेता ने सरेआम बेज्जती कर दी तो हिम्मत दिखा कर नेताजी का पुतला तक जलवा दिया। अब मैदान में कहीं नजर नहीं आते।
कहां हैं, कटार लेकर चलने वाली दबंग नेत्री उषा ठाकुर। लाख विरोध के बाद भी जीत छीन ले आईं, लेकिन अब मैदान से गायब। आप कह सकते हैं कि महू में बिजी होंगी, लेकिन इससे पहले तो हमेशा इंदौर शहर में ही दिखाई देती थीं। कांग्रेस की सरकार बदलने के बाद इंदौर शहर में एक ही काफिला सायरन बजाते गुजरता था। वह था मंत्री तुलसी सिलावट का। नई सरकार में भी मंत्री हैं, लेकिन इस बार वे भी कम ही नजर आ रहे हैं।
अब बात कर लेते हैं पूर्व मंत्री लक्ष्मणसिंह गौड़ की बनाई अयोध्या चार नंबर की। इसकी कमान संभाल रहीं उनकी पत्नी मालिनी गौड़ लगातार विधायक रही हैं। महापौर रह चुकी हैं, लेकिन इन दिनों कहीं नजर नहीं आ रहीं। अतिरिक्त महाधिवक्ता की कुर्सी से खिसककर महापौर बने पुष्यमित्र भार्गव से शहर को बहुत उम्मीद थी। शुरू में लगा भी कि शहर की राजनीति का यह नया खेमा अलग तरह से काम करेगा, लेकिन यहां भी आत्मसमर्पण जैसी ही स्थिति है।
आठ बार की सांसद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ताई समय–समय पर कई मुद्दों पर विरोध करती रहती हैं, लेकिन उनकी कोई सुनता नहीं। हालांकि उनके मुद्दे शहर हित से जुड़े रहे हैं, लेकिन थोड़े कड़वे रहते हैं इसलिए लोग पचा नहीं पाते। नगर अध्यक्ष की कमान गौरव रणदिवे के पास है, लेकिन आजतक यही समझने की कोशिश में हैं कि ‘किसका साथ है किसका हाथ है।‘ इंदौर भाजपा में बचे एकमात्र दलित सावन सोनकर पद पर बैठे होने के बाद भी कहीं नजर नहीं आते। लंबे समय तक वनवास काटने के बाद राऊ से जीत का सेहरा बांध बैठे मधु वर्मा भी गाधी जी के सिद्धांत बुरा मत देखो, बुरा मत बोलो और बुरा मत सुनो पर चल रहे हैं। नगर निगम तथा इंदौर विकास प्राधिकरण का उनका अनुभव भी शहर के किसी काम नहीं आ रहा। अब जो बचे हुए नेता हैं, वे बेचारे होर्डिंग–बैनर–रिकॉर्ड से बाहर नहीं निकल पा रहे।
सीएम साहब, जब से आपने प्रदेश की कमान संभाली है इंदौर की जनता को आपसे बहुत आस है। एक तो पड़ोसी जिले उज्जैन के होने के कारण और दूसरा आपकी निष्पक्षता और निडरता की वजह से भी लोग ज्यादा उम्मीद लगा बैठे हैं। जनता की तरफ से आपसे आग्रह है कि कृपया एक बार इंदौर की राजनीतिक नब्ज टटोलिए। एमबीबीएस न सही, लेकिन हैं तो आप भी डॉक्टर, पता तो लगाइए कि बीमारी क्या है?



